नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सातवां वेतन आयोग (7th Pay Commission) अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में है और 2025 के अंत में समाप्त होने जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में सुधार लाने और महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए एक नए वेतन निर्धारण फॉर्मूले को अपनाने की योजना बनाई है। यह नया फॉर्मूला कर्मचारियों की सैलरी में वार्षिक वृद्धि के साथ-साथ वेतन असमानता को भी खत्म करेगा। आइए जानते हैं इस संभावित बदलाव के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से।

8th Pay Commission के स्थान पर नया फॉर्मूला
कई विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार 8वें वेतन आयोग की घोषणा करने के बजाय एक नया वेतन निर्धारण प्रणाली लागू कर सकती है। मौजूदा प्रणाली में, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी को फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) के आधार पर तय किया जाता है।
इस बार सरकार एक्रोयड फॉर्मूला (Aykroyd Formula) लागू करने पर विचार कर रही है। यह फॉर्मूला कर्मचारियों की सैलरी को महंगाई दर, जीवन स्तर, और रहने की लागत के आधार पर तय करेगा। इससे कर्मचारियों को हर साल बढ़ती महंगाई का प्रभाव महसूस नहीं होगा और उनकी आय में स्थिर वृद्धि होगी।
बेसिक सैलरी में होगी वार्षिक वृद्धि
नए फॉर्मूले के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को हर साल संशोधित किया जाएगा। यह संशोधन कर्मचारियों के प्रदर्शन और महंगाई दर के आधार पर किया जाएगा। परफॉर्मेंस-लिंक्ड इनक्रीमेंट (Performance Linked Increment) प्रणाली के तहत, कर्मचारियों की वेतन वृद्धि उनकी कार्यक्षमता और प्रदर्शन से जुड़ी होगी।
सूत्रों के अनुसार, यह प्रणाली निजी क्षेत्र की कंपनियों की कार्यप्रणाली से प्रेरित है, जहां कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर बोनस या वेतन वृद्धि दी जाती है।
एक्रोयड फॉर्मूला: वेतन निर्धारण का नया आधार
एक्रोयड फॉर्मूला को इस योजना का केंद्र बिंदु माना जा रहा है। यह फॉर्मूला निम्नलिखित मानकों पर आधारित होगा:
- महंगाई दर: बदलती आर्थिक स्थिति और महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए।
- रहने की लागत: प्रत्येक कर्मचारी के जीवन स्तर और उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार वेतन तय किया जाएगा।
- समान वेतन का सिद्धांत: वेतन असमानता को समाप्त कर, सभी कर्मचारियों को समान लाभ प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।
वेतन असमानता को समाप्त करने की पहल
सरकार का लक्ष्य वेतन असमानता को खत्म करना है। मौजूदा प्रणाली में ग्रेड-पे और अन्य संरचनाओं के कारण विभिन्न स्तरों पर वेतन में बड़ा अंतर होता है। नए फॉर्मूले के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को समान वेतन मिले।
यह फॉर्मूला क्यों है जरूरी?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फॉर्मूला न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगा, बल्कि उनकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) को भी बढ़ाएगा। सातवें वेतन आयोग में भी इस बात का सुझाव दिया गया था कि वेतन निर्धारण में अधिक आधुनिक और प्रभावी प्रणाली अपनाई जानी चाहिए।
इससे कर्मचारियों को महंगाई से राहत मिलेगी, और सरकार को भी बजट प्रबंधन में मदद मिलेगी।
कोई आधिकारिक घोषणा नहीं
फिलहाल इस नए फॉर्मूले या 8वें वेतन आयोग की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है, लेकिन इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
Bhupendra Singh Chundawat is a seasoned technology journalist with over 22 years of experience in the media industry. He specializes in covering the global technology landscape, with a deep focus on manufacturing trends and the geopolitical impact on tech companies. Currently serving as the Editor at Udaipur Kiran, his insights are shaped by decades of hands-on reporting and editorial leadership in the fast-evolving world of technology.




