उदयपुर, 5 फरवरी 2025 – राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित कार्यशाला में राजस्थान की डॉ. रजनी पी. रावत ने भाग लेकर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। इस कार्यशाला का प्रमुख विषय “विवाह पूर्व परामर्श एवं शिक्षा” रहा, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों से महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

डॉ. रजनी पी. रावत ने कार्यशाला में विशेष रूप से विवाह के बाद आदिवासी महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के समाप्त होने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि ईसाई और मुस्लिम पुरुषों से विवाह के पश्चात आदिवासी महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है, जिससे उनकी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान खतरे में पड़ जाती है।
उन्होंने इस विषय पर चर्चा करते हुए संविधानिक प्रावधानों और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए संस्कृति के संरक्षण और अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अपने सुझाव दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक शहरीकरण के दौर में आदिवासी महिलाओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें नीतिगत सुधारों के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
झारखंड और छत्तीसगढ़ के उदाहरणों से गंभीर खतरों पर प्रकाश
डॉ. रजनी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बाहुल्य राज्यों के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अवैध रोहिंग्या प्रवासियों द्वारा जनजातीय कृषि भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने लव जिहाद के बढ़ते खतरे को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और आदिवासी बेटियों की सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत बदलावों की जरूरत पर बल दिया।
कार्यशाला में शामिल महिला प्रतिनिधियों के समक्ष संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और संस्कृति को संरक्षित रखते हुए आदिवासी महिलाओं को न्याय दिलाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर राष्ट्रीय महिला आयोग “विवाह पूर्व परामर्श एवं शिक्षा” विषय पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करेगा।
राजस्थान का सम्मानजनक प्रतिनिधित्व
इस कार्यशाला में डॉ. रजनी पी. रावत द्वारा राजस्थान का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व किया गया, जो राज्य की महिलाओं और विशेष रूप से आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
Bhupendra Singh Chundawat is a seasoned technology journalist with over 22 years of experience in the media industry. He specializes in covering the global technology landscape, with a deep focus on manufacturing trends and the geopolitical impact on tech companies. Currently serving as the Editor at Udaipur Kiran, his insights are shaped by decades of hands-on reporting and editorial leadership in the fast-evolving world of technology.




