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अवध की सात लोकसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

अवध की सात लोकसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

लखनऊ, 20 अप्रैल (उदयपुर किरण). वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर में अवध की 16 लोकसभा सीटों में से रायबरेली को छोड़कर भाजपा ने शेष 15 सीटों पर विजय हासिल की थी. इस बार के चुनावी परिदृश्य पर नजर डालें तो अवध की सात लोकसभा सीटों पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में होने के कारण त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं. सभी सात सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और सपा, बसपा गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला होगा. अवध में ही कांग्रेस की तरफ से अयोध्या में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा.निर्मल खत्री, धौरहरा से पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और मोहनलालगंज से पूर्व मंत्री डा. आर.के.चौधरी की प्रतिष्ठा दांव पर है. वहीं उन्नाव से अन्नू टंडन, बहराइच से सावित्री बाई फुले और बहराईच से पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया सपा बसपा गठबंधन और भाजपा के लिए चुनौती बने हुए हैं.
वहीं वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो (2009) में प्रदेश में कांग्रेस को अवध की उन्नाव, धौरहरा, रायबरेली, गोंडा, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच और श्रावस्ती पर जीत मिली थी. जबकि सपा के पास हरदोई, मोहनलालगंज, कैसरगंज और कौशाम्बी सीटें थीं. भाजपा को मात्र लखनऊ सीट से संतोष करना पड़ा था वहीं बसपा को सीतापुर व मिश्रिख लोकसभा सीटें मिली थी.
अवध की 16 लोकसभा सीट
लखनऊ, मोहनलालगंज, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, मिश्रिख, सीतापुर, धौरहरा, लखीमपुरखीरी, गोण्डा, बहराईच, श्रावस्ती, कैसरगंज, अयोध्या, अम्बेडकरनगर और बाराबंकी. इनमें अयोध्या,बाराबंकी,मोहनलालगंज,उन्नाव,धौरहरा,लखीमपुरखीरी और बहराईच में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं.
अयोध्या में डा. निर्मल खत्री की प्रतिष्ठा दांव पर
अयोध्या संसदीय सीट पर गांधी परिवार के करीबी और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. निर्मल खत्री की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. क्षेत्र में जमीनी पकड़ और मिलनसार व्यक्तित्व के चलते डा. निर्मल खत्री दो बार यहां सांसद रह चुके हैं लेकिन इस बार समीकरण उनके पक्ष में नजर नहीं आ रहा है. सपा के आनन्द सेन यादव सपा बसपा वोटर और अपने पिता स्व.मित्रसेन के व्यक्तित्व की बदौलत मैदान मारने की फिराक में हैं. वहीं इस बार अयोध्या लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद लल्लू सिंह, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. निर्मल खत्री और सपा बसपा गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी पूर्व मंत्री आनन्द सेन के बीच मुकाबले के आसार दिख रहे हैं.
आर.के चौधरी के कारण मोहनलाल में लड़ाई में आयी कांग्रेस
पूर्व मंत्री आर.के.चौधरी के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के बाद प्रत्याशी बनाये जाने से मोहनलालगंज में कांग्रेस लड़ाई में आ गयी है. यहां पर भाजपा की तरफ से वर्तमान सांसद कौशल किशोर,सपा बसपा गठबंधन की तरफ से सीएल वर्मा और कांग्रेस से आर.के.चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं.

उन्नाव : साक्षी के मुकाबले में सपा कांग्रेस
उन्नाव वैसे साहित्यकारों की धरती रही है. यहां भी सपा कांग्रेस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. भाजपा सांसद सच्चिद्दानंद हरि साक्षी महाराज के मुकाबले में कांग्रेस की पूर्व सांसद अन्नू टंडन और गठबंधन की तरफ से अरुण शंकर शुक्ला मैदान में हैं.
साक्षी महाराज को 2014 में 5 लाख 18 हजार 834 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर यहां से अरुण शंकर शुक्ला रहे, जिन्हें 2 लाख 8 हजार 661 मतों के साथ शिकस्त का सामना करना पड़ा. उस समय बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में रहे ब्रजेश पाठक को 2 लाख 176 वोट मिले थे. वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार अन्नू टंडन को 1 लाख 97 हजार 98 वोटों के साथ हार का सामना करना पड़ा.
धौरहरा लोकसभा सीट : भाजपा के सामने सीट बचाने की चुनौती
धौरहरा लोकसभा 2008 में अस्तित्‍व में आई थी, यह लोकसभा क्षेत्र लखीमपुर खीरी और सीतापुर के क्षेत्र से अस्तित्‍व में आई. धौरहरा से पहले सांसद कांग्रेस के जितिन प्रसाद चुने गये थे, वह कांग्रेस नेता जितेंद्र प्रसाद के पुत्र हैं. 2014 में यहां से सांसद रेखा वर्मा चुनी गईं. धौरहरा महोत्‍सव यहां का पारंपरिक आयोजन है. धौरहरा लोकसभा सीट से पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के चुनाव लड़ने के कारण भाजपा के सामने सीट बचाने की चुनौती है. 2014 में मोदी लहर में भाजपा प्रत्याशी रेखा वर्मा ने जितिन प्रसाद को हराया था. इस बार भी जातीय समीकरण को देखते हुए भाजपा ने रेखा वर्मा को दुबारा प्रत्याशी बनाया है. भाजपा प्रत्याशी को इस बार भितरघात का भी खतरा है. वहीं गठबंधन के प्रत्याशी ने सपा-बसपा के वोटों की बदौलत मजबूत है. वहीं गठबंधन प्रत्याशी के रूप में अरसद् सिद्दीकी मैदान में हैं.
बाराबंकी : कांग्रेस को वापसी की आस
बाराबंकी सुरक्षित सीट से मौजूदा सांसद प्रियंका रावत का टिकट काटकर भाजपा ने जैदपुर विधानसभा से विधायक उपेन्द्र रावत को लोकसभा प्रत्याशी बनाया है. वहीं गठबंधन प्रत्याशी के रूप में सपा के राम सागर रावत मैदान में हैं. यहां से बाराबंकी के पूर्व सांसद व कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया चुनाव लड़ रहे हैं. पीएल पुनिया की जमीनी पकड़ व मुस्लिमों में पैठ के चलते मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं. ऐसे में जहां भाजपा के सामने बाराबंकी सीट को बचाने की चुनौती है वहीं पर कांग्रेस वापसी की आस में है.
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रियंका सिंह रावत ने कांग्रेस उम्मीदवार पीएल पुनिया को 2 लाख 11 हजार 878 मतों से हराया था. 2014 में बसपा तीसरे व सपा चौथे स्थान पर थी. पिछली बार की लोकसभा प्रत्याशी रही राजराजी रावत भाजपा में शामिल हो गयी हैं. इसलिए भाजपा का पलड़ा भारी लग रहा है.

लखीमपुर खीरी : अजय मिश्रा के सामने कांग्रेस को रोकने की चुनौती
खीरी जिले की अगर आबादी को देखें तो यहां करीब 20 फीसदी मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच मुकाबला हुआ था. भाजपा के अजय कुमार मिश्र को यहां करीब 37 फीसदी वोट हासिल हुए थे, जबकि बसपा प्रत्याशी 27 फीसदी वोट मिले थे. इस सीट पर कांग्रेस के जफर नकवी तीसरे और समाजवादी पार्टी चौथे स्थान पर थी. इस बार भी भाजपा के अजय मिश्र, कांग्रेस के जफर अली नकवी और सपा की डा. पूर्वी के बीच मुकाबला है.
बहराईच में साध्वी सावित्री बाई फुले के राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई
बहराईच की जनता इस बार वर्तमान सांसद सावित्री बाई फुले के राजनीतिक भविष्य का भी चुनाव करेगी. 2014 में भाजपा ने सावित्री बाई फुले को टिकट देकर सांसद बनवाया. 2018 आते —आते वह बागी हो गयी और 2019 में वह कांग्रेस में शामिल हो गयी. इस बार वह कांग्रेस के टिकट पर बहराईच से चुनाव लड़ रही हैं. वहीं भाजपा ने विधायक अक्षयवरलाल गौड़ और गठबंधन की तरफ से राम शिरोमणि वर्मा को उम्मीदवार बनाया है. 2014 में भाजपा का मुकाबला सपा से था. इस बार सावित्री बाई फुले के कांग्रेस पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ने के कारण कांंग्रेस लड़ाई में रहेगी.


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