Sunday , 21 July 2019
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WORLD ASTHAMA DAY : जानें क्या हैं इससे बचने के उपाय…

WORLD ASTHAMA DAY : जानें क्या हैं इससे बचने के उपाय…

World Asthama Day (File Photo)

आज विश्व अस्थमा दिवस है. मई के पहले मंगलवार को अस्थमा दिवस मनाया जाता है. अस्थमा आमतौर पर एलर्जी से संबंधित बीमारी है. इस दिन को मनाने का खास मकसद है कि इस बीमारी से बचने के लिए लोगों में जागरूकता लाई जाए.

इस बीमारी में धूल, धुएं, डस्ट आदि के कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं. सांस की नली में पहुंचने पर ये दिक्कत पैदा करते हैं. सांस की नली में पहुंचने पर इन कणों के कारण सांस लेने में परेशानी होती है. वहीं धीरे-धीरे ये परेशानी बढ़ते हुए अस्थमा का रूप ले लेती है.

इस बार ये है थीम

हर साल अस्थमा डे के लिए अलग अलग थीम बनाई जाती है. साल 2019 के लिए वर्ल्ड अस्थमा डे की थीम एलर्जी एंड अस्थमा रखी गई है.

वहीं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट की मानें तो हर साल लगभग 1000 लोगों की मौत सिर्फ अस्थमा के कारण होती है. जबकि विश्व में इस बीमारी से 339 मिलियन लोग पीडि़त है. भारत में इनकी संख्या 30 मिलियन है.

ये हैं अस्थमा के अलग अलग प्रकार

  • एलर्जिक अस्थमा – इसमें धूल-मिट्टी के संपर्क में आकर सांस लेने से दिक्कत होती है.
  • नॉनएलर्जिक अस्थमा – इसमें अधिक तनाव लेने के बाद अचानक सर्दी लगने लगती है. इसके बाद खांसी जुकाम की शिकायत हो जाती है. ये नॉनएलर्जिक अस्थमा के लक्षण होते हैं.
  • ऑक्यूपेशनल अस्थमा – इस प्रकार में अचानक से अस्थमा का दौरा पड़ता है. इसमे एक तरह के ही काम करने के दौरान आपको अटैक पड़ने लगते हैं. इसे ऑक्यूपेशनल अस्थमा कहा जाता है.
  • चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा – ये सिर्फ बच्चों को होता है. बच्चा जैसे जैसे बड़ा होता है, इस बीमारी से खुद ही बाहर आने लगता है.

ये हैं प्रमुख लक्षण

  • छाती में तनाव
  • सांस फूलना
  • सांस से सीटी की आवाज आना
  • सीने में जकड़न
  • बार-बार जुकाम होना
  • लंबे समय से खांसी आना
  • सीने में दर्द की शिकायत होना
  • थकान महसूस होना
  • होंठ नीले पड़ना
  • नाखूनों का पीला पड़ना

ऐसे करें अस्थमा इलाज

वैसे माना जाता है कि अस्थमा का कोई ठोस इलाज नहीं है. मगर लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे कंट्रोल किया जा सकता है. इसके अलावा अस्थमा को कंट्रोल करने में दवा का रेगुलर इस्तेमाल करना जरूरी है.

अस्थमा को ठीक करने के लिए इंहेलर्स (Inhalers) का उपयोग करना सबसे बेहतर माना जा सकता है. इससे बीमारी को कंट्रोल करने और पीडि़त को अटैक से बचाने में मदद मिलती है. इस बाक का खास ख्याल रखें कि अस्थमा का इलाज न करें. डॉक्टरों की मदद लेकर ही इसकी दवाइयां लें. घर पर खुद से इलाज न करें.


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