Tuesday , 21 May 2019
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दिग्विजय बनाम प्रज्ञा पर लगी सबकी निगाहें

दिग्विजय बनाम प्रज्ञा पर लगी सबकी निगाहें

भोपाल . इस बार पूरे देश की नज़रें भोपाल पर टिक गई हैं जहां से भाजपा की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरी है. भाजपा ने जिस दिन प्रज्ञा ठाकुर को उतारा उसी दिन से ये कहा जा रहा है कि 2019 के चुनाव में हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला भोपाल बनने वाला है क्योंकि मुकाबला भगवा ब्रिगेड की सबसे तीखी ज़ुबानों में शुमार साध्वी प्रज्ञा और कभी अल्पसंख्यकों के सबसे बड़े पैरोकार रहे कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बीच है.

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साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के शहीद हमेंत करकरे पर दिए बयान से सियासी भूचाल उठा. अब यहां के हालात ऐसे हैं कि कभी भगवा आतंकवाद पर मुखर होकर अपनी बात रखने वाले दिग्विजय जो साध्वी के सामने भोपाल के मैदान में खड़े हैं, वो साध्वी का नाम सुनते ही कुछ बोलना नहीं चाहते. दिग्विजय को पता है कि साध्वी को जवाब देने का मतलब एक साथ कई सवाल खड़े करना होगा.

वहीं तमाम आरोपों से इतर भाजपा डंके की चोट पर उस साध्वी को पूरे मान-सम्मान के साथ मैदान में ले आई है जिसमें उसे 2019 की सियासत पलट देने का मद्दा दिख रहा है. दूसरी तरफ भोपाल दो फाड़ होता जा रहा है. मुस्लिम वोटर्स खुलकर कांग्रेस का पक्ष लेते दिख रहे हैं तो वहीं हिंदुओं में भाजपा की साध्वी के लिए ध्रुवीकरण दिख रहा है. दरअसल, कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी यही है. यहां का समीकरण ऐसा है जिसने 30 साल से इस सीट को भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित बना रखा है.

भोपाल में कुल 21 लाख वोटर्स हैं. इसमें मुस्लिम वोटर्स 5 लाख हैं, ओबीसी वोटर्स 4 लाख 75 हजार, ब्राह्मण वोटर्स 4 लाख, राजपूत वोटर्स 1 लाख 50 हजार, SC वोटर्स 1 लाख 25 हजार और ST वोटर्स 1 लाख हैं. मतलब भोपाल में मुसलमान निर्णायक तो हैं लेकिन तब जब उनके साथ ओबीसी का वोट मिले लेकिन एमपी में भाजपा के पास कई बड़े ओबीसी चेहरे हैं. खुद शिवराज सिंह चौहान हैं, उमा भारती हैं और भी कई दिग्गज हैं.

इसके अलावा जो सवर्ण वोटर्स 6 लाख हैं वो भाजपा के पाले में चला जाता है लेकिन इस बार भोपाल खुलकर बंटता जा रहा है. भोपाल का ये मूड दोनों तरफ के लिए चुनौती है. कांग्रेस के लिए ये कि वो धर्मयुद्ध के नारे में ध्रुवीकरण को भोपाल में ही रोके तो भाजपा के लिए चुनौती ये है कि वो इस ध्रुवीकरण को भोपाल से बाहर कैसे ले जाए? फिलहाल भोपाल में भगवा की जय होगी या फिर से दिग्विजय होंगे ये 12 मई को वोटिंग और 23 मई को नतीजे के बाद पता चलेगा.



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