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शहादत का सम्मान नहीं करने वाले बन रहे हैं राष्ट्रवाद के ठेकेदार: कन्हैया

शहादत का सम्मान नहीं करने वाले बन रहे हैं राष्ट्रवाद के ठेकेदार: कन्हैया

बेगूसराय,19 अप्रैल (उदयपुर किरण). सीपीआई के प्रत्याशी कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री एवं भाजपा पर चौतरफा हमला करने के साथ-साथ प्रज्ञा ठाकुर की उम्मीदवारी पर भी सवाल उठाया है. बेगूसराय में शुक्रवार को आयोजित एक दर्जन से अधिक जनसंपर्क कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए कन्हैया ने कहा कि जिन लोगों ने चुनावी रैली के कारण न पटना में और न ही बेगूसराय में शहीद पिंटू कुमार सिंह के प्रति सम्मान व्यक्त करना जरूरी समझा, वे आज राष्ट्रवाद के ठेकेदार बने घूम रहे हैं. यही नहीं, जब सेना में जवान बेहतर सुविधाओं की मांग करते हैं तो उन्हें वही लोग देशद्रोही बताते हैं.

कन्हैया ने कहा कि मेरा राष्ट्रवाद मुझे सिखाता है कि मैं किसी धर्म से नफरत करने की बजाय पिछले कुछ दशकों में गरीबी के कारण लाखों की संख्या में आत्महत्या कर चुके देश के किसानों की समस्याओं को दूर करने की कोशिश करूं. किसानों की समस्या है कि फसलों की सही कीमत नहीं मिल रही है. फलों, सब्जियों आदि को न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में शामिल नहीं करने के कारण बेगूसराय समेत देश के तमाम हिस्सों के किसानों को आर्थिक नुकसान सहना पड़ता है.

कन्हैया ने कहा कि बेगूसराय की धरती के बहुत उपजाऊ होने के बावजूद यहां जैविक खेती को विकसित करने और खेती की नई तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. विज्ञान का इस्तेमाल देश को आगे ले जाने के लिए करना चाहिए था लेकिन देश के प्रधानमंत्री शिक्षा और अनुसंधान के खर्च में कटौती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मेरे राष्ट्रवाद में उन करोड़ों युवाओं की चिंता शामिल है, जिन्हें अपने शहर में पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था नहीं होने के कारण बड़े शहरों में अपमान और गरीबी का सामना करते हुए पढ़ाई करनी पड़ती है. अगर शिक्षा पर बजट का दसवां हिस्सा खर्च किया जाए तो देश के सभी जिलों के युवाओं को इसका फायदा मिलेगा.

कन्हैया ने कहा कि प्रधानमंत्री को नाले की गैस पर बनी चाय तो दिख जाती है लेकिन गटर की सफाई करते समय जान गंवाने वाले सफाईकर्मियों की तरफ उनका ध्यान नहीं जाता. उन्हें देश से प्यार नहीं हो सकता जो देश की समस्याओं पर आवाज बुलंद करने वालों को चुप कराने की कोशिश करते हैं. प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा उम्मीदवार बनाने पर ट्वीट कर कन्हैया ने कहा है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है कि शहीद हेमंत करकरे की शहादत को ‘कर्मों की वजह से मिली मौत’ बताने वाली प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया गया है. अंग्रेजों से माफी मांगकर जान बचाने वालों को नायक मानने वाले और कर भी क्या सकते हैं. उनके मुंह में राम, लेकिन बगल में नाथूराम होता है.


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