Sunday , 26 May 2019
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Lok Sabha Election : जाट लैंड सीट पर गैर जाट मतदाता करेंगे जीत का निर्णय, जातिगत समीकरणों को देखते मुकाबला होगा रोचक

Lok Sabha Election : जाट लैंड सीट पर गैर जाट मतदाता करेंगे जीत का निर्णय, जातिगत समीकरणों को देखते मुकाबला होगा रोचक

रोहतक लोकसभा में नौ विधानसभा क्षेत्र में 16 लाख 66 हजार है मतदाता, दस लाख से अधिक गैरजाट

पंजाबी, ब्राह्मण व यादव रहे हैं निर्णायक, सवा छह लाख से अधिक हैं जाट मतदाता, अब तक जाट प्रत्याशी के खाते में रही हैं रोहतक सीट

1952 में पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के पिता रणबीर सिंह हुड्डा ने जीता था लोकसभा का पहला चुनाव, हरियाणा के गठन के बाद से अब तक जाट समाज का नेतृत्व

रोहतक, 19 अप्रैल (उदयपुर किरण). प्रदेश में सबसे हॉट सीट माने जाने वाली रोहतक लोकसभा सीट भले ही जाट लैंड मानी जाती हो, लेकिन निर्णय हमेशा से गैर जाट मतदाताओं ने ही किया है. इस बार भी गैर जाट मतदाता ही निर्णयाक की भूमिका में रहेंगे. आजादी से लेकर अब तक की बात की जाएग तो रोहतक लोकसभा सीट पर जाट समाज ने ही प्रतिनिधित्व किया है और अकेले हुड्डा परिवार नौ बार इस सीट पर काबिज रहा है. हरियाणा गठन के बाद हुए 14 आम लोकसभा चुनाव में नौ बार कांग्रेस जीती है. भाजपा ने गैर जाट कार्ड खेलकर मुकाबले को रोचक बना दिया है. हालांकि पहले यह कयास था कि जाट मतदाताओं की संख्या को देखते हुए भाजपा भी किसी जाट चेहरे को मैदान में उतारेगी और आखिर तक रस्सा कस्सी का खेल चलता रहा. भाजपा ने रोहतक लोकसभा सीट पर अरविंद शर्मा को उतारकर गैर मतदाताओं को अपनी और आकर्षित करने का दाव खेला है.

रोहतक संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए 14 चुनाव में से कांग्रेस पार्टी नौ बार विजय रही, जबकि एक-एक बार जनसंघ, जनता पार्टी एस व इनेलो उम्मीदवार विजय होकर लोकसभा पहुंचे है. रोहतक संसदीय क्षेत्र में 16 लाख 66 हजार 885 मतदाता है. जातिय समीकरणों पर नजर डाली जाए तो जाट मतदाता सवा छह लाख से अधिक हैं तो पौने दो लाख से अधिक यादव मतदाता, सवा लाख के करीब पंजाबी, डेढ़ लाख के करीब ब्राह्मण मतदाता व तीन लाख के करीब अनुसूचित जाति के अलावा अन्य जातियों के मतदाता शामिल हैं. यह स्पष्ट है कि इस जाट लैड सीट पर हमेशा जीत की भूमिका गैर जाट मतदाताओं ने निभाई है. यह बड़ी बात है कि 1952 से लेकर अब तक हुए चुनाव में इस सीट पर जाट समाज का ही प्रतिनिधित्व रहा है. हरियाणा गठन के बाद 1967 रोहतक संसदीय क्षेत्र के हुए चुनाव में कांग्रेस के रणधीर सिंह ने जनसंघ के रामस्वरूप को पराजित किया था. इसके बाद 1971 में हुए चुनाव में जनसंघ ने बाजी मारी और कांग्रेस के रणधीर सिंह को हराकर मुख्तार सिंह विजयी हुए. 1977 में जनता पार्टी के शेर सिंह जीते तो 1980 में जनता पार्टी (एस) के स्वामी इन्द्रवेश लोकसभा पहुंचे. स्वामी इन्द्रवेश ने जनता पार्टी के शेर सिंह को पराजित किया था. इसके बाद 1984 में कांग्रेस के हरिद्वारीलाल ने लोकदल के स्वरूप सिंह को हराया.

1989 में हुए चुनाव में जनता दल से ताऊ देवीलाल ने कांग्रेस के हरिद्धारीलाल को शिक्सत दी और 1991 से लेकर 1998 तक भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने तीन बार लगातार चौधरी देवीलाल को हराया. 1999 में हुए चुनाव में इनेलो के इन्द्रसिंह ने भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को हरा कर ताऊ देवीलाल की हार का बदला लिया. वर्ष 2004 में फिर भूपेन्द्र सिंह हुड्डा भाजपा उम्मीदवार कैप्टन अभिमन्यु को हराकर लोकसभा पहुंचे. इस दौरान 2005 में हुए उपचुनाव में दीपेन्द्र सिंह हुड्डा रिकार्ड मतों से जीते, उन्होंने अपने प्रतिद्धंदी को करीब साढे चार लाख वोटों से पराजित किया. 2009 में हुए चुनाव में कांग्रेस से दीपेन्द्र हुड्डा ने इनेलो के नफे सिंह राठी को पराजित किया और वर्ष 2014 में फिर से दीपेन्द्र हुड्डा ही सांसद बने. सबसे बड़ी बात यह है कि उस वक्त पूरे देश में मोदी लहर थी और कांग्रेस के खाते में पूरे प्रदेश से रोहतक से दीपेन्द्र हुड्डा जीते थे. हर बार इस सीट पर जातिय समीकरणों को देखते हुए प्रत्याशी उतारे गए है. इस बार भाजपा ने गैर जाट का कार्ड खेला है.


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