Wednesday , 22 May 2019
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मथुरा में लट्ठमार होली का यूं हुआ आगाज….हर दिन बिखरेंगे खुशी के रंग..जानिए कब-कब होंगे आयोजन

मथुरा में लट्ठमार होली का यूं हुआ आगाज….हर दिन बिखरेंगे खुशी के रंग..जानिए कब-कब होंगे आयोजन

mathura holi

नई दिल्ली. बरसाना लट्ठमार होली का आगाज शुक्रवार से हो गया. और इसके बाद होली तक यहा पर रोज कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. मथुरा-वृंदावन और बरसाना की होली विश्व प्रसिद्ध है.

हुरियारिनें खेली जमकर होली- लठमार होली खेलने के लिए नंदगांव से हुरियारे राधारानी के गांव बरसाना पहुंचे. यहां पहले से ही हाथों में प्रेमपगी लाठियां लिए सजी-धजी हुरियारिनें ने रंगीली गली में उनके साथ जमकर होली खेली. लठमार होली को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु बरसाना आए हैं.

हुरियारों पर बरसाईं लाठियां- लट्ठमार होली की उत्सुकता को लेकर लाखों की संख्या में लोग श्रीजी मंदिर परिसर में दिखाई दिए. हुरियारिनें ने अपनी चम-चमाती लाठियां घूंघट की ओट में रह कर हुरियारों पर लाठी बरसाईं. पुलिस प्रशासन की पैनी नजर पूरे बरसाना क्षेत्र में बनी हुई थी.

रंग बिरंगी हुई शुक्रवार की सुबह- राधारानी की नगरी बरसाना में शुक्रवार की सुबह से ही होली का रंग बिखरने लगा था. चारों दिशाओं से होली की मस्ती और आनंद के रंग अबीर गुलाल से सराबोर होते हुए श्रद्धालु राधाजी के मंदिर की तरफ बढ़ रहे थे.

श्रद्धालु ने लगाई परिक्रमा- पहले बरसाना की परिक्रमा लगाई और फिर श्रीजी मंदिर में जाकर दर्शन किए. मंदिर के आंगन में भक्त श्रद्धा भाव से नृत्य करते हुए झूम रहे थे.

मथुरा में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन लट्ठमार होली खेली जाती है, जो कि इस बार 16 मार्च को है. इस दिन नंदगांव के लड़के या आदमी यानी ग्वाला बरसाना जाकर होली खेलते हैं.

लट्ठमार होली का अलग अंदाज- मथुरा के बरसाना गांव में होली की शुरूआत एक अलग अंदाज में होती है. इसका नाम है लठमार होली और ये ब्रज क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध त्योहार है. जो श्री कृष्ण और राधा के पवित्र प्रेम को सर्मपित एक अदभुत होली होती है.

आकाश से फूलों की बारिश- बरसाना में नंदगांव से आने वाले हुरियारों का बेसब्री से इंतजार हो रहा था. आकाश से हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा की जा रही थी. इसी बीच हुरियारों के झुंड पहुंचने लगे. श्रीजी का आशीर्वाद लिया.

फाग के आनंद के बीच शुरू होता है राग और प्रेमपगी गालियों का सिलसिला. राधारानी के गुणगान के बीच कान्हा की महिमागान के जवाबी गान का लंबा सिलसिला.

कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर मनाई जाती है होली– वैसे ब्रज में होली एक ख़ास मस्ती भरी होती है क्योंकि इसे कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर मनाया जाता है. उस पर से लट्ठमार होली का रंग तो बिलकुल हट कर होता है. इस बार ये उत्सव 15 मार्च से शुरू हो गया.

इन तारीखों पर होंगे बड़े कार्यक्रम

मथुरा भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान 17 मार्च

-गोकुल में छड़ीमार होली 18 मार्च

-20 मार्च होलिका दहन फालेन का पंडा आग से निकलेगा

-21 मार्च द्वारिकाधीश मंदिर मथुरा की होली

-22 मार्च दाऊ जी का कोड़ेमार हुरंगा

-22 मार्च को मुखराई चररूकुला नृत्य
-26 मार्च को मानसी गंगा दसविसा ब्राह्मणान हुरंगा एवं होली महोत्सव

-29 मार्च को जतीपुरा गिरिराज जी मंदिर में फूल डोल महोत्सव

बरसाना की लट्ठमार होली देखने के लिए बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं. यूं तो ब्रज में होली का पर्व डेढ़ माह से भी लंबे समय तक मनाया जाता है.

यहां हर तीर्थस्थल की अपनी अलग परम्परा है और होली मनाने के तरीके भी एक-दूसरे से बहुत भिन्न हैं जिनमें बरसाना और नन्दगांव की लट्ठमार होली बिल्कुल ही अलग है.


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