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असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने खर्च किया 113 करोड़ रुपये

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने खर्च किया 113 करोड़ रुपये

कोलकाता, 14 जनवरी (उदयपुर किरण). पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने विगत सात सालों में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु 113 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की है. सोमवार को यह जानकारी राज्य के श्रम विभाग की ओर से दी गई है. दावा किया गया है कि राज्य श्रम विभाग समाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में असंगठित क्षेत्र से अधिक श्रमिकों को लाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रहा है. विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जनवरी से पूरे बंगाल के सभी जिलों में आयोजित होने वाले श्रमिक मेलों (लेबर फेयर) में नामांकन के लिए शिविर लगाए जा‌ रहे हैं. इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विभाग डोर-टू-डोर अभियान भी चलाएगा.

विभाग की ओर से दावा किया गया है कि जनवरी महीने की शुरुआत तक एक करोड़ से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत लाया गया है. तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सात वर्षों में 2011 से 2018 तक योजना के लिए 113 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इसकी तुलना में, वाम मोर्चा सरकार ने ग्यारह साल में 2000 से 2011 तक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए समान योजनाओं पर केवल नौ करोड़ रुपये खर्च किए थे.

उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अप्रैल 2017 में पांच योजनाओं को एक में विलय कर दिया था और इस योजना को समाजिक सुरक्षा योजना का नाम दिया था. योजनाओं के अभिसरण ने विभिन्न असंगठित क्षेत्रों और स्वरोजगार वाले लोगों को लाभान्वित किया है.
योजना के तहत, असंगठित श्रमिकों को किसी भी बीमारी के लिए प्रति वर्ष 20,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिल रही है. अस्पताल में भर्ती होने पर प्रति वर्ष 60,000 रुपये तक की राशि मिलती है. एक श्रमिक को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद भविष्य निधि की व्यवस्था भी राज्य सरकार ने की है.

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