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धधकते अंगारों पर नृत्य, नायाब आतिशबाजी के साथ ऊंट महोत्सव संपन्न

धधकते अंगारों पर नृत्य, नायाब आतिशबाजी के साथ ऊंट महोत्सव संपन्न

बीकानेर, 14 जनवरी (उदयपुर किरण). राजकीय डॉ करणी सिंह स्टेडियम में रविवार को लोकदेवता जसनाथजी महाराज की स्तुति के अग्नि नृत्य तथा नायाब आतिशबाजी के साथ 26 वां ऊंट महोत्सव संपन्न हुआ. उत्सव के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया तथा राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आए लोक कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियों से देशी-विदेशी पर्यटकों का मन मोह लिया. पर्यटकों ने ऊंट की सवारी का भी लुत्फ लिया तथा सजे संवेरे, बेहतरीन फर कटिंग वाले ऊंटों, रोबीलों के साथ सेल्फ ी लेकर उत्सव को यादगार रूप में अपने मोबाइल में संचित किया. मोहम्मद इकबाल ने सांप का प्रदर्शन किया. जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित उत्सव के दूसरे दिन विभिन्न प्रतियोगिताएं हुई, प्रतियोगिताओं में देशी-विदेशी पर्यटकों ने उत्साह व उमंग से हिस्सा लेकर खूब आनंद लिया.

स्टेट बैंक के सहायक प्रबंधक हरीश राजपाल,अम्बेडकर शाखा के मुख्य प्रबंधक पुरुषोतम पलोड़, पर्यटन विभाग के उप निदेशक विकास पण्ड्या, पर्यटन अधिकारी तरुणा शेखावत आदि ने विजेताओं के साथ सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय के सहायक प्रशासनिक अधिकारी शिव कुमार सोनी, मिस मरवण 2015 डिम्पल खींची, खेमसा पुरोहित और पुलिस अधिकारियों, न्यास कर्मचारियों सहित उत्सव में परोक्ष-अपरोक्ष रूप से भागीदारी निभाने वालों को स्मृति चिन्ह से पुरस्कृृत किया. ऊंट महोत्सव के दूसरे दिन हुई मटका दौड़ प्रतियोगिता में तरन्नुम बानों, निशि गोयल व मैमा चैधरी, म्यूजिकल चेयर में श्रद्धा पांडे, सुनीता स्वामी व ललिता कुमारी ने प्रथम, द्वितीय व तृृतीय पुरस्कार हासिल किया. मालासर के महंत रघुनाथजी के नेतृत्व में 4 क्विंटल लकड़ी के अंगारों पर लोकदेवता जसनाथजी महाराज की स्तुति व वंदना के बाद अग्नि नृत्य किया गया. अग्निनृृत्य के दौरान नर्तकों द्वारा अंगारों से अठखेलियां करने पर दर्शकों ने दांतों तले अंगूली दबाली.

डॉ करणी सिंह स्टेडियम में उत्सव के दोनों दिन राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र व अश्व अनुसंधान केन्द्र की ओर से ऊंट व घोड़ों की नस्ल सुधार, उनके संरक्षण व संवद्र्ध के लिए किए जा रहे कार्यों की एक स्टॅाल में प्रदर्शनी लगाई गई. वहीं ऊंटनी के दूध के व्यंजनों, ऊंट की फर की चट्टाई, खाल के बैंग आदि का प्रदर्शन किया गया. बच्चों के लिए मिकी माउंस व झूले नन्हों के लिए आकर्षण का केन्द्र थे.

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