Saturday , 17 November 2018
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अगले साल से 8वीं के पाठ्यक्रम में शामिल होगा अंग दान

अगले साल से 8वीं के पाठ्यक्रम में शामिल होगा अंग दान

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अंगदान को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश दिया था

कोलकाता, 23 अक्टूबर (उदयपुर किरण). पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बड़े पैमाने पर अंगदान के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है. मृत्यु के बाद भी दूसरों को जीवन देने के इस पुण्य कर्म के बारे में लोगों को और अधिक जागरूक करने और अधिक से अधिक प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अंगदान को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश दिया है. मंगलवार को राज्य शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने बताया कि अगले साल से 8वीं श्रेणी के बच्चों को अंगदान के बारे में पढ़ाया जाएगा. जानकारी के अनुसार, 2019 के पाठ्यक्रम में 8वीं श्रेणी के स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा की किताब में इस विषय को पढ़ाया जाएगा. इसके लिए किताब छापने का काम भी पूरा हो चुका है और शिक्षाविद दीपेन बसु इसका संपादन कर रहे हैं.

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अंगदान के लिए लोगों को प्रेरित करने हेतु समय-समय पर जागरूकता अभियान को बढ़ावा दिया है. इसके साथ ही पूरे राज्य में पुलिस को यह निर्देश दिया गया है कि कहीं भी कोई भी व्यक्ति अगर मौत के बाद अपने परिजनों का अंगदान करने की सहमति देता है तो तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उसके अंगों को निकाल कर अस्पतालों में संरक्षित किया जाएगा. इसके लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक अंगों को निकाल कर ले जाने के लिए पुलिस की पायलट कार की मौजूदगी में पूरी सड़क पर ग्रीन कॉरिडोर बनाने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया है. इन सभी प्रक्रियाओं के बारे में पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा.

मंगलवार को इस बारे में पूछने पर दीपेन बसु ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि राज्य में सबसे पहले 2016 में उत्तर 24 परगना के बसीरहाट के स्कूल छात्र स्वर्णेंदु रॉय को एक सड़क दुर्घटना में ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने उसकी किडनी, आंख और लिवर दान किया था. इसके बाद कोलकाता के ईएम बाईपास के पास स्थित एक गैर सरकारी अस्पताल से ग्रीन कॉरिडोर के जरिए उसके अंगों को कोलकाता के तीन अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया था जहां रोगियों को उसके अंग दान किए गए थे. स्वर्णेंदु के बारे में पाठ्यक्रम में विस्तार से उल्लेख किया गया है. उसके अंग दान के बाद उसके स्कूल के और अधिक बच्चों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ी थी और लोग इसके लिए आगे भी आए थे. राज्य भर के लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़े इसीलिए यह पहल की गई है.

दीपेन ने बताया कि बसीरहाट के स्वर्णेन्दु के अलावा पर्णाश्री की काजरी बसु, शोभना सरकार, प्रीतम साहा की तरह अंगदान करने वाले तमाम लोगों का उल्लेख पाठ्यक्रम ने किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में अंगदान के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है. राज्य में 12000 शारीरिक शिक्षा के शिक्षक हैं जिन्हें इस बारे में 2019 से पहले प्रशिक्षित कर दिया जाएगा.

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