Wednesday , 24 October 2018
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कैबिनेट के अहम फैसले, रेलवे कर्मचारियों को बोनस, घाटाग्रस्त पीएसयू होंगे बंद

कैबिनेट के अहम फैसले, रेलवे कर्मचारियों को बोनस, घाटाग्रस्त पीएसयू होंगे बंद

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (उदयपुर किरण). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने बुधवार को कई अहम फैसलों पर अपनी मुहर लगाई. इनमें रेलवे के गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर उत्पादकता बोनस, दो घाटाग्रस्त सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बंद करने सहित कई अहम फैसले शामिल हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सभी पात्र लगभग 11.91 लाख गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों (आरपीएफ / आरपीएसएफ कर्मियों को छोड़कर) के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 78 दिनों की मजदूरी के बराबर उत्पादकता लिंक्ड बोनस (पीएलबी) के भुगतान को मंजूरी दे दी है. पात्र गैर-राजपत्रित रेल कर्मचारियों को पीएलबी के भुगतान के लिए निर्धारित मजदूरी गणना अधिकतम 7000 रुपये प्रति माह तक ही होगी. पात्र रेलवे कर्मचारी प्रति देय अधिकतम राशि 78 दिनों के लिए 17,951 रुपये है.

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने तेल क्षेत्र के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) बैको लॉरी लिमिटेड (बीएलएल) को बंद करने को मंजूरी दे दी है. इस पीएसयू का घाटा कुल परिसंपत्तियों से भी बढ़ गया था. कंपनी के कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) / स्वैच्छिक पृथक्करण योजना (वीएसएस) देने सहित बैको लॉरी लिमिटेड (बीएलएल) को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बीएलएल की निष्क्रिय संपत्तियों को बाद में सरकार के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी देनदारियों को पूरा करने के बाद उत्पादक उपयोग में डाल दिया जाएगा.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय जूट विनिर्माण निगम लिमिटेड (एनजेएमसी) और इसकी सहायक कंपनी बर्ड जूट एंड एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (बीजेईएल) को बंद करने की मंजूरी दे दी है. स्थाई परिसंपत्तियों के साथ-साथ वर्तमान संपत्ति का निपटान 14 जून को हुई डीपीई के दिशानिर्देशों के अनुसार होगा. देनदारियों को पूरा करने के बाद संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त आय, भारत के समेकित निधि में जमा की जाएगी. जून में हुई डीपीई दिशानिर्देशों के अनुसार भूमि प्रबंधन एजेंसी (एलएमए) संपत्तियों के निपटारे के लिए लगाई जाएगी. एलएमए को डीपीई दिशानिर्देशों के अनुसार अपना निपटान करने से पहले संपत्तियों का पूर्ण सत्यापन करने के लिए निर्देशित किया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और लेबनान के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दे दी है. कृषि के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी होगा. एमओयू दोनों देशों में सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं को समझने के लिए प्रोत्साहित करेगा और कृषि क्षेत्रों के साथ-साथ बेहतर वैश्विक बाजार में बेहतर उत्पादकता में मदद करेगा.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पर्यटन के क्षेत्र में भारत और रोमानिया के बीच हस्ताक्षर किए गए समझौते को मंजूरी दे दी. इस समझौते में भारत-रोमानिया पर्यटन को लेकर पर्यटन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करना, पर्यटन से संबंधित जानकारी और डेटा का आदान-प्रदान करने के लिए होटल और टूर ऑपरेटर समेत पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्रों में निवेश, दो तरह के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए टूर ऑपरेटर / मीडिया की यात्राओं का आदान-प्रदान करना, पदोन्नति, विपणन, गंतव्य विकास और प्रबंधन के क्षेत्रों में अनुभवों का आदान-प्रदान करने के लिए, आकर्षक पर्यटन स्थलों के रूप में दोनों देशों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म पर्यटन के माध्यम से बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय सहयोग, सुरक्षित, सम्माननीय और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना और इसके प्रयास करना आदि शामिल हैं.

मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति और ओडिशा के बेहरामपुर में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान (आईआईएसईआर) के स्थायी परिसर की स्थापना का फैसला किया है. आंध्र प्रदेश को दिए जाने वाले पैकेज में तिरुपति में इस संस्थान की स्थापना की बात कही गई थी और 2015 के बजट में बेहरामपुर में इस संस्थान को खोले जाने का प्रावधान किया गया था. प्रत्येक संस्थान में 1875 छात्र अध्ययन करेंगे और इन दोनों संस्थाओं का स्थायी परिसर बनाया जायेगा. ये दोनों संस्थान 2021 दिसम्बर तक बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएंगे और इनमें स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की शिक्षा दी जाएगी.

मंत्रिमंडल ने पर्यावरण योगदान के लिए भारत और फिनलैंड के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी है. इस समझौता-ज्ञापन से दोनों देशों के बीच समानता, आदान-प्रदान और पारस्परिक लाभ के आधार पर पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए दीर्घकालीन सहयोग तथा नजदीकी प्रोत्साहन को बल मिलेगा. इसके मद्देनजर दोनों देशों में लागू कानून और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा.

मंत्रिमंडल ने कौशल विकास के मद्देनजर मौजूदा नियामक संस्थानों राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीटी) और राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एनएसडीए) को मिलाकर राष्ट्रीय व्यावसायी शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना को मंजूरी दे दी है. एनसीवीईटी दीर्घकालीन और अल्पकालीन दोनों तरह के व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के काम में लगे निकायों के कामकाज को नियमित करेगा तथा इन निकायों के कामकाज के लिए न्यूनतम मानक तैयार करेगा.

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