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डिप्रेशन, एंग्जाइटी, ओसीडी के इलाज की नई पद्धति अब भारत में भी

डिप्रेशन, एंग्जाइटी, ओसीडी के इलाज की नई पद्धति अब भारत में भी

नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (उदयपुर किरण). डिप्रेशन, एंग्जाइटी और ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के इलाज के लिए मंगलवार को भारत में पहली बार माइंडफुल ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (टीएमएस) न्यूरोकेयर को लॉन्च किया गया. इसके लिए भारत में एक चिकित्सा सेंटर स्थापित किया जा रहा है जहां पर बिना दवाई के इन सभी मानसिक रोगों का उपचार किया जाएगा. यह उपचार विधि अपने कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होने के चलते विश्व में तेजी से स्वीकारी जा रही है.

ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (टीएमएस) एक बिना चीरफाड़ वाली प्रक्रिया है जिसमें दिमाग में लक्षित कोशिकाओं और न्यूकरोट्रांसमिटर्स को स्टिमुलेट करने के लिए मैग्नेचटिक फील्ड्स का प्रयोग किया जाता है ताकि डिप्रेशन और अन्य मानसिक बीमारियों के लक्षणों को सुधारा जा सके. एक नियमित टीएमएस का सत्र लगभग 19 मिनट तक चलता है और उन्नत संस्करण करीब 9 मिनट, जिसके बाद रोगी तुरंत अपनी सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं.

रंगसंस के एमडी और एनआर ग्रुप के मैनेजिंग पार्टनर पवन रंगा ने कहा कि भारत में मानसिक बीमारियों के साथ तंबाकू की चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं और जागरुकता की कमी के कारण वह शायद इस बीमारी का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि डिप्रेशन से पीड़ित अधिकांश लोग सामने आकर मदद नहीं मांगते हैं. माइंडफुल एमएस न्यूरोकेयर में हमारा उद्देश्य जागरुकता पैदा करना और उन मरीजों की मदद करना है जिन्होंने इलाज को लेकर प्रतिक्रिया नहीं दी है.

लोयोला यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, शिकागो, अमेरिका के मनोचिकित्सा व व्यवहारगत न्यूरोसाइंसेस विभाग में प्रोफेसर और चेयरमैन डॉ. मुरली एस. राव ने कहा कि एंटी-डिप्रेसेंट्स डॉक्टरों द्वारा दिए जाने वाले शुरुआती उपचार हैं लेकिन मुमकिन है कि यह रोगियों की अधिक संख्या के लिए उपयुक्त न हों. ऐसी स्थितियों में यदि मौजूदा उपचार के साथ एक उन्नत और प्रभावी पद्धति भी जोड़ दी जाए तो यह उन हजारों मरीजों की मदद करेगी, जो फिलहाल चुपचाप दर्द सहन कर रहे हैं.

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