Wednesday , 24 October 2018
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कर्मचारियों ने लगाया विश्वासघात का आरोप, रात से चल सकेंगी रोडवेज बसें

कर्मचारियों ने लगाया विश्वासघात का आरोप, रात से चल सकेंगी रोडवेज बसें

आंदोलन किया स्थगित, चुनाव में सबक सिखाने की कही बात, रात से चल सकेंगी रोडवेज बसें

जयपुर, 6 अक्टूबर (उदयपुर किरण). प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद इस बार सबसे ज्यादा घाटे में सरकारी कर्मचारी रहे हैं. मांगे पूरी ने होने के बाद गुस्साए हजारों हडताली कर्मचारियों ने अब सरकार पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया है और चुनाव में सरकार को सबक सिखाने की बात कही है. कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उनको सरकार भ्रम में डालती रही ताकि उनकी मांगों पर टाला जाता रहे.

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों की निंदा करते हुए राज्य सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाया है. राज्य सरकार ने विभिन्न संगठनों के आंदोलनों को कुचलकर सामंतशाही सरकार होने का परिचय दिया है जिसकी जितनी आलोचना की जाए उतनी कम है. आचार संहिता लागू होने के साथ सभी कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन स्थगित कर दिया. इस कारण इसका सबसे ज्यादा फायदा आम जनता को मिलेगा जो रोडवेज की हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित थी. अब उन यात्रियों को राहत मिली है. इन यात्रियों की निजी और प्राईवेट बसों की मनमानी से बडी राहत मिलेंगी. जानकारी के अनुसार आज रात से रोडवेज बसों का आवागमन शुरु हो सकता है.

महासंघ के प्रदेश महामंत्री तेजसिंह राठौड एवं संयुक्त महामंत्री अर्जुन शर्मा ने संयुक्त बयान जारी कर आरोप लगाया की गत 4 माह से राज्य सरकार के केबिनेट मंत्री व अधिकारी लगातार कर्मचारी संगठनों के साथ वार्ताओं एवं समझौतो का ढोंग रचते रहे एवं गुमराह कर आंदोलनों को टालने के षडयंत्र रचते रहे, इस बात का खुलासा आज आदर्श आचार संहिता की घोषणा के बाद हुआ. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार के द्वारा बार-बार कर्मचारियों को 8, 16, 24, 32 वर्ष के सेवाकाल पर पदोन्नति पद का वेतनमान देने, न्यूनतम वेतन 18 हजार करने, एम.टी.एस. घोषित करने, नवीन पेंशन योजना में जमा कर्मचारियों की राशि को जी.पी.एफ. में जमा कराने जैसे मामलो में पूरी तरीके से सहमति हो जाने के बावजूद भी आदेश जारी नहीं कर कर्मचारियों के विश्वास को खण्ड-खण्ड किया है. उ

न्होंने कहा कि इस दमनात्मक कार्यवाही एवं विश्वासघाती नीति को भुला नहीं पायेगा एवं समय आने पर माकूल जवाब देगा. राज्य सरकार ने अपने अंतिम क्षणों में भी काम नहीं तो वेतन नहीं के आधार पर आंदोलनकारी कर्मचारियों के सम्बन्ध में वेतन काटने का आदेश निकाल कर कर्मचारी विरोधी होने को प्रमाणित किया है. आगामी चुनाव में इस कार्य का कर्मचारी मुंहतोड जवाब देंगे.

आचार संहिता लागू होने के बाद कर्मचारी संघों में जोर -शोर से हो रही चर्चा रही कि उनकी मांग पूरी हुई या नहीं हुई लेकिन सरकार ने आखिर राशि बचा ली. सरकार के साथ नियत समय में वार्ता में सहमति नहीं बनने के कारण कर्मचारी आंदोलन के दौरान रखी गई मांग अधूरी रह गई वहीं विभिन्न विभागों के अधिकांश कर्मचारियों की मांग पूरी करने पर सरकार पर जो 10000 करोड़ का भार होता वो बच गया है. अब सभी कर्मचारी संघ के आंदोलन स्थगित हो चुके है तो अब चुनाव में जो राजनीतिक दल उनकी मांग पूरीकरने का आश्वासन देगा उसके पक्ष में कर्मचारियों की सहानभूति दिख सकती है.

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