Saturday , 17 November 2018
Breaking News
रक्तदान के बाद खून की बर्बादी का पाप : डॉ. कविता सारस्वत

रक्तदान के बाद खून की बर्बादी का पाप : डॉ. कविता सारस्वत

रक्तदान को महादान कहा जाता है. कहते हैं की एक यूनिट खून तीन लोगों की जान बचा सकता है. केंद्र और राज्यों की सरकारों के साथ ही तमाम गैर सरकारी संगठन लंबे समय से रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाते रहे हैं. उसका असर भी हुआ है और देश में हर साल लाखों की संख्या में लोग विभिन्न माध्यमों से स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए सामने आने लगे हैं. इसके बावजूद अभी भी देश में ऐसी स्थिति नहीं बन सकी है कि हर रोगी को जरूरत पड़ने पर खून मिल ही जाये. अमूमन ब्लड बैंकों में खून की उपलब्धता को लेकर कमी की बातें ही कही जाती है. ऐसे में अगर कहीं से खून की बर्बादी की खबर आये तो उसे काफी दुर्भाग्यपूर्ण माना जाना चाहिए.

पिछले दिनों आयी एक ऐसी ही खबर ने रक्तदान कार्यक्रम के औचित्य पर सवालिया निशान लगा दिया है. आरटीआई द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाईजेशन (नाको) का कहना है कि सिर्फ 2017 में ही 7,22,406 यूनिट खून और ब्लड कंपोनेंट बर्बाद हो गये. खून की कुल मात्रा का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में खून को टैंकरों में भरा जाए तो इससे लगभग साठ टैंकरों को भरा जा सकता है. जिस देश में पर्याप्त मात्रा में खून उपलब्ध न होने की बात कही जाती है, वहां यदि एक साल में ही इतनी बड़ी मात्रा में खून की बर्बादी हो रही है, तो इस पर विचार किया जाना चाहिए.

इसी आरटीआई के जवाब में यह भी बताया गया है कि देशभर के ब्लड बैंकों ने पिछले पांच साल के दौरान ब्लड और ब्लड कंपोनेंट्स के रूप में लगभग 28 लाख यूनिट खून को उपयोग नहीं हो पाने की वजह से नष्ट कर दिया. रक्तदान से इकट्ठा किये गये खून को नष्ट करने के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा है, जहां 2017 में 1,00,027 यूनिट खून बर्बाद हो गया. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में 99,887 यूनिट, उत्तर प्रदेश में 44,724 यूनिट और गुजरात में 55,452 यूनिट खून बिना उपयोग किये हुये ही बर्बाद हो गया. 2016 में भी देश भर में लगभग 6.69 लाख यूनिट खून उपयोग नहीं हो पाने की वजह से बर्बाद हो गया था. रक्तदान के बाद ब्लड बैंक में रखे गये खून को अधिकतम 30 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. वहीं खून से यदि ब्लड प्लाज्मा को अलग कर लिया जाए तो उसे एक साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है. लेकिन इस मामले में देश में बड़ी लापरवाही की स्थिति देखी गयी. क्योंकि उपयोग न हो पाने की वजह से न केवल खून की बर्बादी हुई, बल्कि ब्लड प्लाज्मा भी काफी मात्रा में बर्बाद हुआ.

रक्तदान के प्रति बढ़ रही जागरूकता की वजह से आमतौर पर ब्लड डोनेशन के कार्यक्रमों में काफी मात्रा में खून एकत्र कर लिया जाता है, लेकिन ब्लड बैंकों और अस्पतालों के बीच संवादहीनता होने की वजह से रक्तदान में एकत्र किये गये खून की बड़ी मात्रा का समय रहते उपयोग नहीं हो पाता है. ऐसे में 30 दिन का समय बीत जाने के बाद उस खून के एक्सपायर हो जाने के बाद उसे नष्ट कर दिया जाता है. माना जाता है कि रक्तदान में एकत्र होने वाले खून में लगभग दो फीसदी खून संक्रमित होता है, जिसका मरीजों की जान बचाने में उपयोग नहीं किया जा सकता है. शेष लगभग 98 फीसदी खून का मरीजों की जान बचाने में उपयोग किया जा सकता है. कई बार ऐसा भी देखा गया है कि किसी एक अस्पताल में खून की जरूरत होती है, लेकिन वहां खून की कमी होती है. जबकि वही खून दूसरे अस्पताल के ब्लड बैंक में उपलब्ध होता है, परंतु संवादहीनता की वजह से उस खून का जरूरत वाले अस्पताल में उपयोग नहीं हो पाता है. ऐसे में कुछ समय बाद ये खून एक्सपायर हो जाता है और फिर उसे नष्ट कर दिया जाता है.

यही वजह है इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 2015 में एक सलाह पत्र जारी करके सभी अस्पतालों को कहा था कि यदि उनके पास रखे खून की अवधि 20 दिन हो गई है तो उन्हें खुद ही अन्य अस्पतालों से संपर्क कर जरूरत के मुताबिक खून दे देना चाहिए, ताकि समय रहते उसका उपयोग हो सके और वह बर्बाद न हो. नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाईजेशन (नाको) द्वारा आरटीआई के तहत दी गई जानकारी से हुआ खुलासा चौंकाने वाला है, क्योंकि अपने देश में हर साल हजारों लोगों की मृत्यु समय से खून नहीं मिल पाने की वजह से हो जाती है. खून (आरबीसी) के अलावा ब्लड प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की कमी की वजह से भी कई मरीजों को जान गंवानी पड़ती है. ऐसी स्थिति में अगर देश में हर साल लाखों यूनिट खून और ब्लड कंपोनेंट्स बर्बाद हो रहे हैं, तो इस विषय पर चिंतन करना आवश्यक है.

नाको ने जो जानकारी उपलब्ध करायी है, उसके मुताबिक 2017 में रक्तदान कार्यक्रमों के जरिये कुल 1,14,56,878 यूनिट खून इकट्ठा किया गया था. इसमें से लगभग ढाई लाख यूनिट खून संक्रमित था. इस वजह से उसे जांच के बाद ही नष्ट कर दिया गया. लेकिन इसके अलावा लगभग सवा सात लाख यूनिट खून की उपयोग न हो पाने की वजह से बर्बादी होना गंभीर चिंता की बात है. एक यूनिट खून लेने के बाद उससे ब्लड प्लाज्मा, आरबीसी (रेड ब्लड सेल) और प्लेटलेट्स को अलग कर लिया जाता है, ताकि जिस मरीज को जिस चीज की जरूरत हो, उसे वह दिया जा सके. समझा जा सकता है कि सवा सात लाख यूनिट खून जो बर्बाद हो गया वो कितने लोगों को नया जीवन दे सकता था.

अभी भी समय है कि देश की चिकित्सा संस्थाएं और सरकार खुद भी इस विषय पर गंभीरता पूर्वक विचार करें और इस बात की मुकम्मल व्यवस्था करें कि किसी भी हालत में एक भी यूनिट खून बर्बाद न हो. रक्तदान करने वाला हर व्यक्ति यह सोच कर रक्तदान करता है कि उसका खून किसी की जिंदगी बचाने में काम आयेगा, लेकिन अगर वह खून यदि बर्बाद हो जाता है तो यह न केवल उस खून के और खून को इकट्ठा करने वाले साधनों की बर्बादी है, बल्कि एक मानवता के प्रति एक अपराध भी है. इस पर शीघ्र ही ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि रक्तदान के जरिये आने वाला एक एक बूंद खून जरूरतमंद रोगी के काम आ सके.

Report By Udaipur Kiran

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*