Friday , 18 October 2019
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हॉस्पिटल पुराण : किडनी में पथरी छोड़ शर्मा मरीज के हार्ट के साथ करता रहा खिलवाड़, मामूली बीमारी से बिगड़े केस ने पंहुचाया अहमदाबाद

उदयपुर। हम आज आपको एक ऐसे हॉस्पिटल के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां उपचार कराना खतरनाक ही नहीं जानलेवा साबित हो सकता है। इस हॉस्पिटल में मरीजों का उपचार नहीं किया जाता बल्कि उन्हें ऐसी हालत में पहुँचा दिया जाता है जहां उसकी जान अहमदाबाद या अन्य शहरों के बड़े अस्पतालों में जाकर ही बचाई जा सकती है। यह हॉस्पिटल उदयपुर के भुवाणा चौराहे पर है, जिसका नाम है शर्मा हॉस्पिटल।

इस हॉस्पिटल का संचालन डॉक्‍टर अनिल शर्मा और उनकी पत्नी डॉक्टर कुसुम शर्मा करती है। इसमें इनका गैरजिम्मेदार बेटा डॉक्‍टर धवल शर्मा डाक्टरी जैसे पवित्र पैशे को मजाक समझते हुए लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। डॉक्‍टर धवल शर्मा द्वारा उपचार के नाम पर की गई, काली करतूत का खुलासा अहमदाबाद के सिम्स हॉस्पिटल में हुआ। सिम्स के चिकित्सकों ने जब इस बात का खुलासा किया कि मरीज की राईट किडनी में घाव है, तो परिजनों के हाथ पैर फूल गए। यह घाव शर्मा हॉस्पिटल में गैरजिम्मेदार डॉक्‍टर धवल शर्मा ने पथरी के आॅपरेशन के दौरान डाले गए स्टेन को अनाड़ी तरीके से निकालकर दिया था। जिससे मरीज की किडनी में घाव लगा और वह मौत के मुंहाने पर पहुंच गया । इस लापरवाही की पुष्टि सिम्स हॉस्पिटल अहमदाबाद के डिस्चार्ज सर्टिफिकेट से भी होती है, जिसमें बताया गया है कि मरीज को युरोआॅफ्सिस और किडनी में गंभीर चोट थी, जिसका वहां पर उपचार किया गया। आइये, मरीज की जान खतरे में डालने वाले शर्मा हॉस्पिटल से सिम्स हॉस्पिटल तक पहुँचने की पूरी हकीकत से आपको भी अवगत करवाते है।

19 जनवरी 2018 से शर्मा हॉस्पिटल में मरीज की जिन्दगी से खिलवाड़ और लूट की कहानी शुरू होती है। पथरी की पीड़ा से परेशान रोगी की मुलाकात गैरजिम्मेदार डॉक्‍टर धवल शर्मा से हुई। जहां पहले की गई जांच रिपोर्ट उसे दिखाई गई। इस पर धवल शर्मा ने ब्लड प्रेशर ज्यादा होने की बात कहते हुये अमर आशीश हॉस्पिटल में हार्ट की ‘इको- जांच करवाने की सलाह दी। मरीज और उसके परिजन अमर आशीश हॉस्पिटल गये, जहां डॉक्‍टर अनंत सक्सेना ने जांच के बाद बताया कि ‘इको’ की नहीं, बल्कि टीएमटी जाँच की जरूरत है। बाद में रोगी को ट्रेड मील पर दौड़ाया गया, पंद्रह मिनट बाद डॉक्टर सक्सेना ने बताया कि इन्हें हार्ट की कोई बीमारी नहीं है। यह रिपोर्ट देखने के बाद धवल शर्मा ने रोगी को 20 जनवरी को शर्मा हॉस्पिटल बुलाया, जहां सुबह से कुछ भी नहीं खाने – पीने की हिदायत दी। साथ ही यह आश्वासन भी दिया कि आॅपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की चीर – फाड़ नहीं की जाएगी। दोपहर बाद करीब 3 बजे मरीज को आॅपरेशन थियेटर में ले जाया गया। जहां डॉक्‍टर अनिल शर्मा और युरोलाॅजिस्ट डॉक्‍टर भूपेश पटेल ने अपनी टीम के साथ आॅपरेशन किया। लेकिन यह ऑपरेशन पीठ में छेद करके किया गया, जिसका पता रोगी को आइसीयू में होंश आने पर लगा। जब उसने पूछा कि मेरी पीठ में छेद क्यों किया गया ? यह तो तय नहीं था ? तो वहां मौजूद डॉक्‍टर ने कहा – यह जरूरी था, इसलिए किया गया। जहां से चार दिन बाद 24 जनवरी को मरीज को छुट्टी दे दी गई। इस दौरान मरीज को बताया गया कि ग्यारह एमएम का स्टोन किड्नी में था, जिसे तोड़कर निकाल दिया गया है और पेशाब की नली के रास्ते एक स्टेण्ट डाला गया है, जिसे 21 दिन बाद निकाला जाएगा। पहले कहा गया था कि आॅपरेशन में कुल 35 हजार का खर्चा होगा, लेकिन आॅपरेशन के बाद डिस्चार्ज तक 61 हजार रूपए वसूल लिये गये। नौ फरवरी को रोगी ने डॉक्‍टर धवल शर्मा से फोन पर बात कर कहा कि ग्यारह फरवरी को 21 दिन पूरे होंगे, स्टेण्ट निकालना है। इस पर गैरजिम्मेदार डॉक्‍टर धवल ने कहा – ‘आप तो आज ही आ जाओ , शाम तक स्टेण्ट निकाल देंगे। इस पर रोगी फिर अपने तिमारदार परिजनों के साथ शर्मा हॉस्पिटल पंहुचा, जहाँ करीब 3 बजे डॉक्‍टर धवल शर्मा ने ऑपरेशन थियेटर में रोगी को बेहोश किये बिना ही स्टेण्ट खींचकर निकाल दिया। मरीज दर्द से तड़प उठा। तुरंत ही डॉक्‍टर धवल शर्मा, जो यूरोलॉजिस्ट नहीं हैं, ने रोगी को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया और परिजनों को काउंटर पर पैसे जमा कराने के लिए कहा। दो घंटे बाद धवल शर्मा ने रोगी को कहा कि – अब घर जा सकते हो। तभी मरीज टाॅयलेट करने गया तो यूरीन के साथ काफी खून भी निकला। इस पर धवल शर्मा ने कहा कि ‘आॅपरेशन के बाद ऐसा तो होता है।’ उसने मरीज की हालत की गंभीरता को समझे बिना ,उसे घर जाने की छुट्टी दे दी ।

अब तक हमने आपको शर्मा हॉस्पिटल में हुए पथरी के आॅपरेशन और स्टेण्ट निकालने की हकीकत से रूबरू करवाया। लेकिन असल बात तो अब शुरू होती हैं। महज 24 घण्टे के बाद मरीज को तेज ठण्ड लगने के साथ ही बहुत तेज बुखार चढ आया, साथ ही असहनीय दर्द होने लगा । तुरंत ही उसे फिर से शर्मा हॉस्पिटल ले जाया गया ,जहां गेर जिम्मेदार डॉक्‍टर धवल शर्मा ने वायरल फीवर होने की बात कहकर दवा दे दी और कुछ आराम मिलने पर घर भेज दिया। मरीज और परिजन कहते रहे कि डॉक्टर साहब इन्फेक्शन तो नहीं है ? तो उसने कहा – नहीं – नहीं एसा कुछ नहीं है। रात तीन बजे फिर से हालत बिगड़ने पर शर्मा हॉस्पीटल ने पेशेन्ट को भर्ती कर लिया और भाड़े के डॉक्‍टरों को बुलाकर इलाज करने लगा। मरीज को फिर से आईसीयू में ट्रीटमेन्ट दिया जाने लगा, जिसमें दवाइयों की अधिक से अधिक खपत पर जोर रहा।

गेर जिम्मेदार डॉक्‍टर धवल शर्मा ने फिर अपनी अनुभवहीनता का परिचय देते हुए मरीज के शरीर के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया। प्रतिदिन पंद्रह से 20 हजार के हाई डाॅज के इन्जेक्शन, ऑपरेशन थियेटर से लगे इन्फेक्शन को खत्म करने के लिये दिये जाने लगे। दोनो हाथों में बार – बार कैनुला बदल – बदल कर इंजेक्शन ठोके जाने लगे। लेकिन हद तो तब हो गई जब आईसीयू स्टाॅफ ने मरीज के सीने में छेद करके हार्ट की वैन से कनेक्शन ले लिया और उसमें कई सारी नलियां लगा दी। मरीज को इसी तरीके से इंजेक्षन और अन्य दवाईयां दी जाने लगी । जांच के लिए बार – बार खून भी वहीं से लिया गया । ‘दो दिन बाद 12 फरवरी की दोपहर मरीज की हालत काफी खराब हो गई तो गैर जिम्मेदार डॉक्‍टर धवल शर्मा और उसका सहयोगी कहने लगा पैशेन्ट को डायलिसिस की जरूरत है और इसकी हमारे हॉस्पिटल में व्यवस्था नहीं है। इसे नडियाद ले जाना चाहिए। इस पर परिजन पूछते है कहीं किडनी तो खराब नहीं हो गई ? स्टोन ही तो निकाला गया फिर ऐसा कैसे हो गया। इस सवाल का शर्मा हॉस्पिटल के किसी भी कर्ताधर्ता के पास कोई जवाब नहीं था। हास्यास्पद और आश्चर्यजनक बात यह रही की शर्मा दम्पती और उनका बेटा धवल शर्मा मरीज के पास आकर कहने लगे – भगवान पर भरोसा रखो। ठाकुरजी को याद करते रहो। इस पर मरीज कहता है वह तो मैं कर ही रहा हूं आप तो सही से ईलाज पर ध्यान दो। तभी हॉस्पिटल का स्टाफ बताता है कि मरीज को हार्ट की तकलीफ है और तुरन्त अन्यत्र शिफ्ट करना पड़ेगा। इस दौरान डॉक्‍टर धवल शर्मा दौड़कर आता है और कहता है अहमदाबाद के सिम्स हॉस्पिटल में उसका एक मित्र है, धवल प्रजापति। वह हार्ट का स्पेशलिस्ट हैं, वहां जाकर मेरा रेफरेंस दे देवें। उसने डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में यह हवाला भी दिया कि मरीज को उचित उपचार के लिए हायर सेंटर भेजा जा रहा है। बाद में शर्मा हॉस्पिटल से एंबुलेंस में एक डॉक्टर और मेडिकल स्टाॅफ के साथ जीवन रक्षक उपकरण लगाकर मरीज को उसके परिजन अहमदाबाद ले गये ।

इस तरह शर्मा सूपर स्पेश्यलिटी हॉस्पिटल के डॉक्‍टरों ने एक भले चंगे इंसान की जान को मामूली उपचार में ही खतरे में डाल दिया। अब हम आपको बताते है कि सिम्स हॉस्पिटल में क्या कुछ हुआ और कैसे वहां के चिकित्सकों ने जिन्दगी और मौत से जूझ रहे पैशेन्ट की बीमारी महज आधे घण्टे में पकड़ कर उसे बचाने के उपचार शुरू कर दिए।

सिम्स हॉस्पिटल में पता चला कि मरीज को हार्ट की कोई बीमारी नहीं है। उसकी हालत तो यूरीन इंफेक्षन और धवल शर्मा द्वारा स्टेन निकालते समय बरती गई लापरवाही से किड्नी में पहुंची चोट के कारण खराब हुई है। सिम्म के डॉक्‍टर रुपेश धवल शाह ने बताया कि किडनी में चार एम एम का स्टोन अभी भी पड़ा है, जिससे इंफेक्षन हुआ हैं । फाइण्डिंग यही रही कि शर्मा हॉस्पिटल में भारी लापरवाही रही । शर्मा हॉस्पिटल ने साढ़े ग्यारह एम एम का स्टोन तोड़कर चार एम एम का टुकड़ा अंदर ही रहने दिया। ऑपरेशन पूरा नहीं किया । सिम्स अस्पताल में 12 दिनों तक मरीज मौत से लड़ता रहा। दो बार उसके आॅपरेषन हुए। एक बार तो इन्फेक्षन का मलबा निकालने के लिए और दुसरी बार अनिल षर्मा द्वारा अंदर छोड़ दिए गऐ स्टोन का टूकड़ा निकालने के लिए। वैसे मरीज अभी काफी हद तक ठीक हो चुका लेकिन किडनी को बचाए रखने की दवाईयां उसे लम्बे समय तक लेनी होगी।

शर्मा हॉस्पिटल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जाता हैं। इस आपबीती से यह तो साबित हो ही गया है कि वास्तव में शर्मा हॉस्पिटल में गैर जिम्मेदार चिकित्सक है। जो मरीज के शरीर में हाई डाॅज की दवाईयां डालते है और असल बीमारी का पता लगाए बिना, दूसरी बीमारी की दवा दे देकर उसे मरणासन्न स्थिति में लाकर छोड़ देते हैं। हम सभी दर्शकों से अपील करता है कि ऐसे गैर जिम्मेदारा चिकित्सकों से इलाज नहीं करवाए। क्योंकि यह आपके परिजनों की जान को खतरे में डाल सकते हैं

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