Wednesday , 18 September 2019
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सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल महिला की डेढ़ साल में नौ सेंटीमीटर हड्डी डॉक्टरों ने बढ़ाई

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल महिला की डेढ़ साल में नौ सेंटीमीटर हड्डी डॉक्टरों ने बढ़ाई

Raipur,7अगस्त (उदयपुर किरण). पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, Raipur से सम्बद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के अस्थि रोग विभाग के डॉक्टरों ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल महिला मरीज को डेढ़ साल के लम्बे व क्रमबद्ध उपचार के बाद फिर से अपने पैरों में खड़े होकर चलने के काबिल बना दिया. दुर्घटना में महिला मरीज के कूल्हे की हड्डी, जांघ की हड्डी और पैर की हड्डी बुरी तरीके से क्षतिग्रस्त हो गई जिससे धीरे-धीरे मवाद आना शुरू हो गया था. अस्थि रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आथोर्पेडिक सर्जन डॉ. एस. एन. फूलझेले के मार्गदर्शन तथा एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा जैन शाह के सहयोग से हुए इस आपरेशन में डॉ. राजेन्द्र अहिरे, डॉ. सौरभ जिंदल, डॉ. गौतम कश्यप तथा डॉ. अभिषेक तिवारी की मुख्य भूमिका रही.

इस उपचार में सबसे पहले डॉक्टरों ने जांघ की हड्डी को जोड़ा फिर कमर की हड्डी को और सबसे अंत में पैर की हड्डी को इलिजारो तकनीक से जोड़ा. इस विधि से प्रतिदिन एक-एक मिलीमीटर हड्डी को इलिजारो उपकरण के जरिये बढ़ाते हुए कई महीनों के अथक प्रयास के बाद औसतन 8 से 9 सेमी. हड्डी बढ़ाकर मवाद के कारण गली हुई हड्डी के स्थान पर बढ़ी हुई नई हड्डी को जोड़ा. अभनपुर की निवासी27 वर्षीय मरीज निरंतर फॉलोअप हेतु चिकित्सालय आ रही है. मरीज के मुताबिक, इलाज के उचित प्रबंधन के जरिये ही वह अपने पैरों में दुबारा खड़ी हो सकी. इन डेढ़ सालों में  इलाज नि: शुल्क हुआ. विशेषज्ञ की टीम में डॉ. एस. एन. फुलझेले (विभागाध्यक्ष), डॉ. विनीत जैन, डॉ. राजेन्द्र अहिरे, डॉ. नीतिन वले, डॉ. प्रणय श्रीवास्तव, डॉ. अभिषेक तिवारी, डॉ. सौरभ जिंदल, डॉ. संजय नाहर शामिल रहे.

आर्थ्रोस्कोपी से इलाज की सुविधा

विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एन. फूलझेले कहते हैं कि घुटने तथा कूल्हे के जोड़ों के प्रत्यारोपण के साथ ही साथ, बच्चों में क्लब फुट व सीमा पर तैनात घायल जवानों के घुटने तथा लिगामेंट के उपचार के लिये अस्थि रोग विभाग दिनों -दिन प्रसिद्ध होता जा रहा है. यहां हड्डियों के ट्यूमर का  आपरेशन होने के साथ-साथ, आर्थ्रोस्कोपी के जरिये विशेष प्रक्रिया से हड्डियों की बीचों-बीच स्थित लिगामेंट का पुनर्निमाण कर जोड़ों की समस्या से मरीज को राहत दी जाती है.

घुटने में स्थित लिगामेंट के रप्चर हो जाने या चोट लग जाने के प्रकरणों में आथ्रोस्कोपी यंत्र एक वरदान है. इसकी मदद से क्रुशिएट, मेनिसकस या कार्टिलेज की मरम्मत करना हो, साइनोबियम या कटे-फटे मांस के टुकड़े को बाहर निकालना हो, जोड़ के अंदर इन्फेक्शन, टीबी या ट्यूमर हो ठीक करना हो या जोड़ के अंदर पानी भरे होने पर ऊतक जांच (बायोप्सी) के लिए नमूना लेना हो सभी प्रकार के जांच व शल्य क्रिया आर्थ्रोस्कोपी की मदद से बड़ी आसानी से की जा सकती है.

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