Friday , 18 October 2019
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सर्विक्स कैंसर स्क्रीनिंग पर डाॅ. महाजन को मिलेगा राइजिंग स्टार अवार्ड

उदयपुर। ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण से महिलाओं में होने वाले गर्भाषय के मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए जीबीएच मेमोरियल कैंसर हाॅस्पिटल के मेडिकल आॅकोलाजिस्ट डाॅ. मनोज यू महाजन को अमेरिका में राइजिंग स्टार अवार्ड से नवाजा जाएगा।

इंडो-अमेरिकन कैंसर एसोसिएषन (आईएसीए) और वल्र्ड हैल्थ आॅर्गोनाइजेषन (डब्ल्यूएचओ) के सांझे में जीबीएच मेमोरियल कैंसर हाॅस्पिटल ने गोगुंदा, कोटड़ा, झाड़ोल और खेरवाड़ा में दिसंबर 2017 से नवंबर 2018 तक स्क्रीनिंग की। इसमें 26 से 60 साल तक की 6000 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग की थी। करीब एक साल में की गई इस स्क्रीनिंग में 500 से अधिक महिलाएं गर्भाशय के मुंह के कैंसर से पीड़ित पाई गईं। यह रिपोर्ट डब्ल्यूएचओ और आईएसीए में देने पर डब्ल्यूएचओ फ्रांस में फरवरी 2018 में दुनिया के सभी देषों की रिपोर्ट पर मंथन हुआ था।

इसमें जीबीएच मेमोरियल कैंसर हाॅस्पिटल की एक साल में हुई स्क्रीनिंग को सराहा गया और जीबीएच मेमोरियल कैंसर हाॅस्पिटल को अगले चरण में 25 हजार महिलाओं की स्क्रीनिंग का टाॅस्क दिया गया है। उस आधार पर आईएसीए ने 2 जून को अमेरिकन सोसायटी आॅफ क्लिनिकल आॅकोलाॅजी (एएससीडी) के सांझे में होने वाली वार्शिक बैठक में डाॅ. मनोज यू महाजन को आमंत्रित किया है। वहां उन्हें आईएससीएस राइजिंग स्टार अवार्ड से नवाजा जाएगा। ग्रुप डायरेक्टर डाॅ. आनंद झा ने बताया कि डाॅ. महाजन देष के पहले कैंसर रोग विषेशज्ञ होंगे जिन्हें अमेरिका में इस एसोसिएषन की ओर से राइजिंग स्टार अवार्ड दिया जाएगा। इससे पहले एसोसिएषन की ओर से सिर्फ अमेरिका के ही कैंसर रोग विषेशज्ञ को यह अवार्ड मिलता आया हैं।

ऐसे की स्क्रीनिंग

जीबीएच के मेडिकल आॅन्कोलोजिस्ट डॉ. मनोज यू महाजन ने बताया कि प्रोजेक्ट लाइफ के नाम से षुरू किए गए स्क्रीनिंग प्रोग्राम को अमेरिका में रहने वाले विश्व कैंसर रोग विशेषज्ञ और जीबीएच मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. कीर्ति जैन के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की खासियत है कि देष में पहली बार महिलाएं इस तरह का वायरस की जांच खुद करती है। डाॅ. महाजन ने बताया कि इंडो-अमेरिकन कैंसर एसोसिएषन और डब्ल्यूएचओ ने एक विषेश तरह का कीट उपलब्ध कराया है। इस कीट के उपयोग की प्रक्रिया का प्रषिक्षण जीबीएच मेमोरियल कैंसर एसोसिएषन में डब्ल्यूएचओ के डाॅक्टर्स ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दिया है। इन कार्यकर्ताओं ने गोगुंदा, कोटड़ा, खेरवाड़ा और झाड़ोल क्षे़त्र के गांवों में ग्राम सभा और षिविर आयोजित कर महिलाओं को गर्भाषय के कैंसर की जानकारी दी और इसके बाद इसकी जांच के तरीकों का प्रषिक्षण दिया। इसके बाद 6000 महिलाओं को कीट उपलब्ध कराकर उसका सैंपल एकत्रित किया है।

नेगेटिव रिपोर्ट में भी दस साल तक खतरा नहीं

सैंपल में वायरस का पता लगाना उतना ही आसान है जितना प्रेग्नेंसी का महिलाएं पता लगा सकती है। सैंपल नेगेटिव आने की स्थिति में महिला को अगले दस साल तक गर्भाषय के मंुह का कैंसर होने का खतरा नहीं होता है। यदि रिपोर्ट पाॅजिटिव होती है तो उसी सैंपल की लैब में जांच के बाद कैंसर की स्टेज का पता लगाया जाता है। प्रथम व द्वितीय स्टेज के कैंसर का उपचार ओपीडी बेसेस पर करके आजीवन महिला को गर्भाषय के मुंह के कैंसर से बचाना संभव हुआ है।

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