Wednesday , 17 July 2019
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सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को बैंकों ने लगाया पलीता

सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को बैंकों ने लगाया पलीता

गोपालगंज:19 जून (उदयपुर किरण). प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत पिछले पांच साल में 237 बेराेजगारों को रोजगार देने का देने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सकता है. 866 आवेदकों में से महज 147  बेरोजगारों को बैंक से लोन मिल पाया है. सरकार  की ड्रीम योजना को बैंकों ने पलीता लगा दिया हैं. दूसरी तरफ बैंक अधिकारी का कहना है कि उद्योग विभाग से आए आवेदन जो बैंक के नियम के दायरे में हैं, उनका भुगतान समय पर कर दिया जाता है. जो बैंक केनियम के दायरे में नहीं आता है, उसे विभाग को लौटा दिया जाता है.

उद्योग विभाग के आंकड़े पर गौर किया जाय तो सरकार ने वित्तीय वर्ष 14-15 में जिला के 34 बेरोजगारों का रोजगार सृजन करने के लिए लोन देन का लक्ष्य निर्धारित किया था. इसके लिए  184 बेरोजगारों ने आवेदन दिया. टास्क फोर्स कमिटी की पांच सदस्यीय टीम ने कागजात की जांच की और इनमें से 34 आवेदकों का लोन लेने के लिए चयन किया था. स्वीकृत आवेदन बैंक को भेजा गया. वर्ष 15-16 में 29 के विरुद्ध  122 आवेदन, वर्ष 16-17 में 29 के विरुद्ध 109,वर्ष 17-18 में 64 के विरुद्ध 267,वर्ष 18-19 में 284 स्वरोगार खड़ा करने क लिए शिक्षिक बेरोजगारों ने आवेदन  दिया था. 147 बेरोजगारों को रोजगार खड़ा करने के लिए 12 करोड़ 35 लाख 500 सो रुपये का कर्ज  बैंक ने दिया जबकि स्वीकृति के बाद भी पांच वर्षो में बैंकों ने 90 युवकों का लोन नहीं दिया. सरकार बेरोजगारी दूर करने व स्वरोजगार को अपनाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं लेकिन बैंकों की शिथिलता के कारण समय पर लोन की राशि नहीं मिल पाती है. शिक्षित बेरोजगार रोजगार की आस लगाए बैंकाें का चक्कर लगाने पर मजबूर रहे हैं.

इस योजना में बेरोजगारी दूर करने के लिए लघु, कुटीर, घरेलू आदि उद्योग स्थापित करने के लिए पढ़े- लिखे युवकों को बैंक से लोन मिलता है. है. ब्यूटी पार्लर, बेकरी लघु उद्योग, मसाला उद्योग, जेंट्स पार्लर, प्लास्टिक ग्लास उद्योग, बेकरी उद्योग, आटोमोबाइल पार्ट्स, आटोमोबाइल सर्विस  आदि रोजगार के लिए सरकार कम ब्याज  पर लोन देती है. विभाग की मानें तो राज्य स्तर पर राष्‍ट्रीयकृत बैंक में उनके कोटा के अनुसार स्वीकृत आवेदनों को भुगतान के लिए भेजा है लेकिन बैंक के अधिकारी लोन देने में लापरवाही बरतते हैं. स्थल जांच,प्राेजेक्ट रिपोर्ट और लोन वापसी की गांरटी  देखने के बाद ही लोन की राशि का भुगतान करते हैं. सरकार  बेरोजगारी दूर करने व स्वरोजगार को अपनाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं. लेकिन, बैंकों की शिथिलता के कारण समय पर ऋण की राशि नहीं मिल पा रही है. 17-18 में राजकुमार शर्मा ने लकड़ी उद्योग लगाने, बेकरी लघु उद्योग के लिए अभिषेक कुमार, मसाला उद्योग लगाने के लिए नीरज कुमार ने आवेदन दिया था. उन लोगों ने बताया कि जांच कमिटी ने 34 आवेदकों का चयन किया था जिसमें से महज 14 लोगों को ही बैंक ने राशि का भुगतान किया. इन लोगों ने बताया कि बैंक अधिकारी के कार्य स्थल का निरीक्षण करने और योजना से लोन के लिए मांगे गए कागजात  तैयार कराने में काफी विलंब हो जाता है. इतना सब कुछ कराने के बाद भी बैंकों में बार-बार दौड़ लगानी पड़ती है.

बैंक के अधिकारी ना तो लोन देने के लिए हां कहते हैं न ही समय पर लोन  देते हैं. जिसके कारण सरकार की यह योजना विफल है. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार की स्व रोजगार योजना है. इसके तहत उद्योग लगाने पर 10 लाख रुपये का लोन मिलता है. सामान्य जाति के आवेदक को मिले लाेन से उद्योग लगाने के बाद 15 प्रतिशत सब्सिडी और आरक्षित जाति के आवेदकों को 25 प्रतिशत की सब्सिडी देने का नियम है. जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक कमलेश सिंह ने बताया कि सरकार तो लक्ष्य पूरा करने को लेकर उद्योग विभाग को बराबर पत्र भेजती है. लोन के लिए आए आवेदन पत्र को टास्क फोर्स कमिटी के सदस्य कागजात और इंटरव्यू लेने के बाद स्वीकृत आवेदन को चिन्हित राष्ट्रीयकृत बैंकों को भेज देते हैं इसके बाद भी आवेदन पत्र पर बैंक समय से लोन का भुगतान  नहीं करते है. लीड बैंक के सहायक महाप्रबंधक संतोष कुमार ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत जो भी उद्योग विभाग से आवेदन भेजे हैं उसपर त्वरित कार्रवाई करने को लेकर जिले के सभी बैंकों काे पत्र भेजा गया है.

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