Monday , 16 September 2019
Breaking News
माहवारी कोई अपराध नहीं, एक साधारण हार्मोनल प्रक्रिया है

माहवारी कोई अपराध नहीं, एक साधारण हार्मोनल प्रक्रिया है

फर्रुखाबाद. भारत और विश्व के कई देशों में महिलाओं और किशोरियों को माहवारी प्रबंधन में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसलिए प्रत्येक 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के रूप में मनाया जाता है.

जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म सम्बन्धी गलत अवधारणा को दूर करना और महिलाओं और किशोरियों को माहवारी प्रबंधन सम्बन्धी सही जानकारी देना है.

ये बात मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर चंद्र शेखर ने विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर महिलाओं और किशोरियों को सम्बोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि 28 मई की तारीख निर्धारित करने के पीछे मुख्य अवधारणा ये है कि मई वर्ष का पांचवा महीना होता है. जो अमूमन प्रत्येक 28 दिनों के पश्चात होने वाले स्त्री के पांच दिनों के मासिक चक्र का परिचायक है.

इस मौके पर डाक्टर नविता सूद ने कहा कि माहवारी किशोरावस्था से नवयौवन में प्रवेश करने वाली 9 से 13 वर्ष की लड़कियों के शरीर में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल प्रक्रिया है. जिसके फलस्वरूप उनके शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं. आम बोलचाल की भाषा में कहें, तो ये प्रजनन से सम्बन्धित प्रकृति द्वारा प्रदत्त प्राकृतिक प्रक्रिया है. ये प्राकृतिक प्रक्रिया सभी लड़कियों में किशोरावस्था के अंतिम चरण से शुरू होकर उनके संपूर्ण प्रजनन काल (रजोनिवृत्ति पूर्व) तक जारी रहती है.

आज भी बहुत सी किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं. महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है. जबकि आधे से ज्यादा को तो ये लगता है कि मासिक धर्म कोई अपराध है.

जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

विश्व स्वास्थ्य संग़ठन की रिपोर्ट के अनुसार देश में 58 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं. डाक्टर नमिता ने कहा कि गलत सोच की वजह से आज भी देश के कई परिवारों में लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान परिवार से अलग कर दिया जाता है. मंदिर जाने या पूजा करने की मनाही होती है. रसोई में प्रवेश वर्जित होता है. यहां तक कि उनका बिस्तर अलग कर दिया जाता है और परिवार के किसी भी पुरुष सदस्य से इस विषय में बातचीत न करने की हिदायत दी जाती है. मासिक धर्म को लेकर जागरुक होना जरूरी है.

जिला महिला अस्पताल में तैनात डाक्टर नमिता दास कहती हैं कि मासिक धर्म के बारे में बताने वाली सबसे अच्छी जगह स्कूल हैं. जहां इस विषय को यौन शिक्षा और स्वच्छता से जोड़कर चर्चा की जा सकती है. इसके लिए जागरुक और उत्साही शिक्षकों की जरुरत है. जो विद्यार्थियों को मासिक धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के विषय में जानकारी दे सकें.

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज की एएफ़एचएस काउंसलर हेमलता का कहना है कि किशोरियों की बैठक कराकर उनको माहवारी के बारे में जागरुक तो करते हैं लेकिन ये पर्याप्त नहीं है.वो कहती हैं कि घर में बच्चियों की माएं भी इस बारे में अपनी सोच बदलें और इस बारे में अपनी बेटियों को ठीक से बतायें ताकि उनकी बेटी को किसी के सामने शर्मिंदा ना होना पड़े और वो हर बात से जागरुक रहे.

https://udaipurkiran.in/hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Inline

Click & Download Udaipur Kiran App to read Latest Hindi News

Inline

Click & Download Udaipur Kiran App to read Latest Hindi News