Sunday , 21 July 2019
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मासिक धर्म शर्म नहीं, घर में और बाहर नि:संकोच बात करें, दर्द होने पर ले पैरासीटामोल

मासिक धर्म शर्म नहीं, घर में और बाहर नि:संकोच बात करें, दर्द होने पर ले पैरासीटामोल

झांसी, 28 मई(हिं.स.). समाज की किशोरियां ही मातृ शक्ति का रूप है. अगर समाज की किशोरियां स्वस्थ्य रहेंगी तभी वह स्वस्थ मां बन सकेंगी और हमारा समाज संतुलित रहेगा. इसके लिए मासिक धर्म पर घर में और बाहर बात करना बहुत जरूरी है. तभी हम इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर सकते हैं. उक्त विचार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संयुक्त निदेशक डा. रेखा रानी ने व्यक्त किए. वह माहवारी दिवस पर एक होटल में किशोरियों को संबोधित कर रही थी.

मंगलवार को एक स्थानीय होटल में संयुक्त निदेशक व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. के. जैन व सिफ़प्सा के मण्डल प्रबन्धक आनंद चौबे की अध्यक्षता में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग एक कार्यशाला का आयोजन किया गया.

इस कार्यशाला में लगभग 100 किशोरियों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम की शुरुआत में मासिक धर्म के चक्र को समझने के लिए आई किशोरियों से सफ़ेद और लाल मोतियों के हाथ का ब्रेसलेट बनाया गया. जिसमें 28 दिन के चक्र को समझते हुये, 28 मोती लिए गए. जिसमें 23 सफ़ेद और 5 लाल मोती लिए गए. बताया गया कि 5 मोती का मतलब 5 दिन चलने वाली माहवारी से है. व 23 मोती से मतलब बाकी 23 दिन जब हमारा शरीर मासिक प्रक्रिया की तैयारी करता है. इसके बाद किशोरियों से सवाल जवाब का सिलसिला शुरू हुआ. जहां न सिर्फ उपस्थित विशेषज्ञों ने किशोरियों से सवाल किए, बल्कि किशोरियों ने भी अपनी अपनी समस्याओं को साझा करते हुये विशेषज्ञ से उनके जवाब भी मांगे. कार्यशाला में बच्चियों को सेनेटरी पैड के साथ आयरन की गोलियां भी बांटी गई. आयरन की गोलियों को किस तरह लेना है इसके बारे में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी डा. ए के त्रिपाठी ने बताया.

अंत में मासिक धर्म नहीं है शर्म का नारा देते हुये सभी किशोरियों ने शपथ ली कि वह अब से इस विषय पर खुलकर बात करेंगी. कार्यक्रम का  संचालन डीएचईआईओ विजय श्री शुक्ला ने किया. कार्यशाला के दौरान अपर डा. रामबाबू डीईआईसी मैनेजर, अनुपमा यादव क्वालिटी मैंटर, सोनम राठौर मण्डल समन्वयक सीफार, किशोरियों की माताएं, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आदि मौजूद रहे.

दर्द होने पर ले पैरासीटामोल

नरिया बाज़ार की रहने सुरभि पांडे ने सवाल किया कि माहवारी के दौरान जब पेट में बहुत दर्द हो तो क्या करना चाहिए, जिसके जवाब में विशेषज्ञ डा. गरिमा ने बताया कि थोड़ा बहुत दर्द होना सामान्य है, लेकिन यदि दर्द बहुत ज्यादा है तो पैरासीटामोल दवा ले सकते है. वही वर्षिका श्रीवास्तव ने सवाल किया कि इन दिनों शरीर में थकान क्यों महसूस होती है और इसके लिए क्या करना चाहिए, इसपर संयुक्त निदेशक ने उसे पोषण युक्त भोजन खाने की सलाह दी.

क्या है माहवारी

माहवारी एक लड़की के जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसमें योनि से रक्तस्राव होता है. माहवारी एक लड़की के शरीर को माँ बनने के लिए तैयार करती है. एक लड़की की पहली माहवारी 9-13 वर्ष के बीच कभी भी हो सकती है. हर परिपक्व लड़की की 28-31 दिनों के बीच में एक बार माहवारी होती है. माहवारी का खून गन्दा या अपवित्र नहीं होता है. यह खून गर्भ ठहरने के समय बच्चे को पोषण प्रदान करता है. कुछ लड़कियों को माहवारी के समय पेट के निचले हिस्से में दर्द, मितली और थकान हो सकती है. यह घबराने की बात नहीं है.

प्रबंधन व निपटान

माहवारी में सूती कपड़े के पैड का उपयोग सबसे अच्छा रहता है. अगर कपड़े का पैड नहीं है तो सूती मुलायम कपड़े को पैड की तरह मोड़कर उपयोग करना चाहिए. हर दो घंटे में पैड बदलना चाहिए. पैड बदलने के समय जननांग को पानी से धोकर सुखा लें. उपयोग किये हुए पैड को साबुन व ठंडे पानी से धोना चाहिए व तेज धूप में सुखाना चाहिए. ऐसा करने से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं. सूख जाने के बाद पैड को एक साफ़ धुली कपड़े की थैली में मोड़कर रखें. माहवारी में उपयोग किये गए पैड या कपड़े को खुले में नहीं फेंकना चाहिये क्यूंकि ऐसा करने से उठाने वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा हो सकता है. हमेशा पैड को पेपर या पुराने अखबार में लपेटकर फेंकना चाहिये या पैड को जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़ देना चाहिये.

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