Friday , 18 October 2019
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‘मस्तिष्क में ट्यूमर का रेडिएशन द्वारा सफल उपचार’


उदयपुर। गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल के कैंसर व न्यूरो सर्जन विशेषज्ञों ने अकाउस्टिक न्यूरोमा से पीड़ित 61 वर्षीय महिला रोगी का रेडियो सर्जरी द्वारा सफल उपचार किया। सफल इलाज करने वाले विशेषज्ञों की टीम में रेडिएशन आॅन्कोलोजिस्ट डाॅ रमेश पुरोहित एवं न्यूरो सर्जन डाॅ उदय भौमिक शामिल थे।

बांसवाड़ा निवासी कंकू बाई (उम्र 61 वर्ष) पिछले काफी समय से सिरदर्द, कान में झन-झन, चक्कर आना, सुनने में दिक्कत एवं ज्यादा लाईट या तेज़ रोशनी से चुभन होने जैसी परेशानियों से ग्रसित थी। इसी दर्द के चलते उनका स्थानीय अस्पताल से दवाईयों द्वारा इलाज चल रहा था। इलाज में खास आराम न पड़ने पर उन्हें गीतांजली हाॅस्पिटल के न्यूरो सर्जन डाॅ उदय भौमिक के पास रेफर किया गया। डाॅ भौमिक द्वारा कराई गई एमआरआई की जांच में रोगी के मस्तिष्क में लगभग 2 सेंटीमीटर आकार का ट्यूमर होने का पता चला।

डाॅ भौमिक ने बताया कि आमतौर पर मस्तिष्क में इस तरह के ट्यूमर का उपचार आॅपरेशन द्वारा किया जाता है। किन्तु इस मामले में ट्यूमर 2 सेंटीमीटर आकार का था जिसे गीतांजली कैंसर सेंटर में उपलब्ध अत्याधुनिक रेडियोसर्जरी तकनीक की सहायता से बिना आॅपरेशन, मात्र एक दिन में उपचार संभव है इसलिए इसे रेडियोसर्जरी द्वारा उपचार की योजना पर कार्य किया गया। और इसी कारण रोगी को रेडिएशन आॅन्कोलोजिस्ट डाॅ रमेश पुरोहित के पास रेफर किया गया।

डाॅ रमेश पुरोहित ने बताया कि इस रोगी के मस्तिष्क में आठवीं नस पर ट्यूमर था। यह नस आंतरिक कान को मस्तिष्क से जोड़ती है। इस बीमारी को अकाउस्टिक न्यूरोमा कहते है। इस बीमारी का इलाज रेडियोसर्जरी द्वारा किया गया। इसमें केवल उसी आठवीं नस के ऊपर एक सिंगल शाॅट में हाई डोज़ रेडिएशन दिया गया जिससे ट्यूमर की कोशिकाओं को खत्म किया गया। इसमें 1 घंटें का समय लगा। इस प्रक्रिया द्वारा इलाज से मस्तिष्क के बाकी हिस्सों को कोई नुकसान नहीं हुआ एवं रोगी के सुनने की क्षमता और चेहरे की नसों को बचाया गया तथा ट्यूमर को विकसित होने से रोका गया। आमतौर पर इस प्रक्रिया द्वारा इलाज कराने पर डेढ़ से दो लाख तक का खर्चा होता है परंतु इस रोगी का इलाज राजस्थान सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत निःशुल्क हुआ। डाॅ पुरोहित ने यह भी बताया कि 3 सेंटीमीटर से छोटे ट्यूमर का इलाज रेडियोसर्जरी द्वारा किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से इलाज द्वारा चेहरे की नसें एवं सुनने की क्षमता को सुरक्षित किया जाता है।

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