Wednesday , 18 September 2019
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मधुमेह रोगियों में दृष्टिहीनता की समस्या का खतरा

मधुमेह रोगियों में दृष्टिहीनता की समस्या का खतरा

प्रयागराज, 28 जुलाई (उदयपुर किरण). मधुमेह के रोगियों में दृष्टिहीनता का खतरा बना रहता है. मधुमेहियों को नेत्र रोग विशेषज्ञ से परीक्षण करवाते रहना चाहिए. समय से निदान होने पर दवाओं द्वारा उपचार किया जा सकता है, नहीं तो लेजर सर्जरी करवानी पड़ती है. यह जानकादी एम्स, New Delhi से आए डाॅ. दिनेश तलवार ने रविवार को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज में आयोजित डायबिटीज एजूकेशन फाउण्डेशन शिविर में दी.

इस मौके पर New Delhi से आए पद्मश्री डाॅ. अतुल कुमार ने कहा कि मधुमेह से आंखों के परदे पर प्रभाव पड़ता है. परदे में पानी भर जाता है और खून के छींटे पड़ने से परदा खराब हो जाता है. उन्होंने 35-36 की उम्र में परदे की जांच करवाने की सलाह दी. दिल्ली के ही डाॅ. ललित वर्मा ने कहा कि हम लोग आवश्यकता से ज्यादा भोजन करते हैं और व्यायाम बहुत कम करते हैं. जिसकी वजह से मधुमेह होता है और मधुमेहियों में नेत्र संबंधी विकार हो जाते हैं.

Kolkata से आए डाॅ. पार्थ विश्वास ने कहा कि विभिन्न समस्याओं के लिए जब लोग रक्त परीक्षण करवाते हैं तब उन्हें मधुमेह का पता चलता है. जिन मरीजों की रक्त शर्करा नियंत्रित नहीं होती उन्हें नेत्र रोग जल्दी हो जाता है. वाराणसी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डाॅ. ओम प्रकाश मौर्या ने मधुमेहियों में होने वाले नेत्र रोगों की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे मरीजों में बार-बार बिलनी हो जाती है. मोतियाबिन्द व काला मोतियाबिन्द कम उम्र में भी हो सकता है. इस अवसर पर शिविर में कुल 220 लोगों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया.

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