Sunday , 21 July 2019
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भारत ने AIDS के नियंत्रण को लेकर इस अनुसंधान पर दिया जोर

भारत ने AIDS के नियंत्रण को लेकर इस अनुसंधान पर दिया जोर

Aids
  • हालांकि एचआईवी/एड्स को 2030 तक जनस्वास्थ्य को खतरे के तौर पर दूर करना बड़ी चुनौतियां बनी हुईं हैं
  • एड्स को वैश्विक स्तर पर समझने, उसके उपचार एवं रोकथाम में काफी प्रगति हुई है

भारत एचआईवी/एड्स उन्मूलन की दिशा में लगातार कठिन प्रयास कर रहा है. ऐसे में एड्स की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारत ने आजीवन चलने वाली एंटीरेट्रोवायरल थेरैपी (एआरटी) की जरूरत कम करने के लिए नई दवाएं एवं उपचार पद्धतियां विकसित करने और निदान में सुधार के लिए अनुसंधान तेज करने के प्रयासों पर बल देने का अनुरोध किया है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने एड्स पर राजनीतिक घोषणा और एचआईवी संबंधी प्रतिबद्धता की घोषणा के क्रियान्वयन’ पर महासभा के सत्र में सोमवार को कहा, “ एड्स के खिलाफ लड़ाई में काफी प्रगति हुई है. हालांकि एचआईवी/एड्स को 2030 तक जनस्वास्थ्य को खतरे के तौर पर दूर करना बड़ी चुनौतियां बनी हुईं हैं.’’

उन्होंने कहा कि एड्स को वैश्विक स्तर पर समझने, उसके उपचार एवं रोकथाम में काफी प्रगति हुई है, लेकिन अब भविष्य की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने और अहम क्षेत्रों में अनुसंधान को तेज करने का वक्त आ गया है.

इन अहम क्षेत्रों में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों का पता लगाने के लिए बेहतर निदान मुहैया कराना, एआरटी कवरेज बढ़ाना, दवाइयां और नई उपचार पद्धतियां विकसित करना शामिल है ताकि जीवन भर चलने वाली एआरटी की जरूरत कम की जा सके और एचआईवी संक्रमण के नए मामलों को रोका जा सके.’’

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