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बिना डिग्री के संचालित हो रही चश्में की दुकानें, आंखों से खिलवाड़

बिना डिग्री के संचालित हो रही चश्में की दुकानें, आंखों से खिलवाड़

हरदा, 14 जून (उदयपुर किरण). शहर में संचालित चश्में की दुकानों में अनट्रेड स्टॉफ बिना किसी डिग्री या डिप्लोमा के आंखों का इलाज कर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है. ऐसे में अगर किसी की आंख के साथ खिलवाड़ होता है, तो इसकी परवाह किसी को नहीं है.

हरदा जिला मुख्यालय सहित आसपास के इलाकों में करीब 100 दुकानें चश्मा बनाने वालों की हैं. इसमें से अधिकतर दुकानदारों के पास चिकित्सक सुविधा नहीं है. फिर भी इन दुकानों पर आंखों की जांच कर चश्में का नंबर देने का काम धड़ल्ले से चल रहा है, यहां तक कि उनके स्टाफ के पास कोई अनुभव भी नहीं है, फिर भी यहां पर आंखों की जांच अत्याधुनिक मशीनों से की जा रही है, जिसके कारण धीरे-धीरे मरीजों की आंखों की रोशनी कम होने लगी है.

अगर किसी मरीज को शुगर की बीमारी होती है, तो उसे चिकित्सक शुगर की जांच कराने के बाद ही चश्में का नंबर देता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता. चश्में के व्यापारी खुद ही चिकित्सक बनकर आंखों की जांच करके चश्में का नंबर दे देते हैं, जिसके कारण मरीजों को मोतियाबिंद, आंख के पर्दे में खराबी आना या आंखों में काला पानी आना जैसी बीमारियां हो जाती हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की इन दुकानों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं दे सकते नंबर 

नियमों के अनुसार चश्में की दुकान चलाने वालों के लिए 2 साल का ऑप्टोमेटिक डिप्लोमा कोर्स होना आवश्यक है, लेकिन शहर की अधिकांश दुकानों के पास ऑप्टोमेटिक डिप्लोमा स्टाफ नहीं है. इन दुकानों पर अंट्रेड स्टॉप बिना किसी डिग्री व डिप्लोमा के आंखों की जांच कर लोगों की आंखों से खिलवाड़ कर रहा है. इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा के जिम्मेदार अधिकारी इन पर कार्रवाई करना तो दूर, जांच करना भी उचित नहीं समझते. शहर में करीब हर बाजार में दो से चार चश्मा बनाने वालों की दुकानें हैं. इनमें से अधिकतर दुकानों के पास चिकित्सक नहीं है. इन दुकानों में आंखों की जांच करने और चश्मे का नंबर देने का काम अत्याधुनिक मशीनों के जरिए अंट्रेड स्टाफ धडल्ले से कर रहा है.

इनका कहना है 

उक्त संदर्भ में जानकारी हासिल की जाएगी कि  जो यह आंखों की जांच कर रहे हैं उनके पास कोई डिग्री या डिप्लौमा है या नहीं. चश्में की दुकानों की जांच कराई जाएंगी. अगर जांच के दौरान गलत पाया गया, तो उचित कार्रवाई की जाएगी.
डॉ. प्रदीप मौजेस, जिला चिकित्सा अधिकारी हरदा.

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