Wednesday , 16 October 2019
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बाहर निकाला गहरे कोमा से, बिना ओपन सर्जरी के

बाहर निकाला गहरे कोमा से, बिना ओपन सर्जरी के

उदयपुर। गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल के न्यूरो एवं वेसक्यूलर इंटरवेंशनल रेडियोलोजिस्ट डाॅ सीताराम बारठ ने 52 वर्षीय रोगी को नया जीवन प्रदान किया। रोगी के मस्तिष्क की नसों में ब्लाॅकेज था। जिसे डाॅ बारठ ने बिना ओपन सर्जरी के, कैथेटर डायरेक्टिड थ्रोम्बो सक्शन एवं थ्रोम्बोलायसिस नामक प्रक्रिया द्वारा सफल इलाज कर गहरे कोमा से बहार निकाल जान बचाई।

पीपलियां, जिला मंदसौर निवासी मनोहर लाल (उम्र 52 वर्ष) अचानक बेहोश हो गए थे। आपातकालीन स्थिति व बेहोशी की हालत में ही उन्हें गीतांजली हाॅस्पिटल में न्यूरोलोजिस्ट डाॅ विनोद मेहता के नेतृत्व में भर्ती किया गया। एमआरआई जांच में पाया गया कि मस्तिष्क में रक्त अंदर तो जा रहा था परंतु अवरुद्ध नसों के कारण बाहर नहीं आ रहा था। इसे सेरीब्रल साइनस थ्रोम्बोसिस कहते है। इस कारण मस्तिष्क में अधिक सूजन आ गई जिससे रोगी गहरे कोमा में चला गया। चूंकि नसों में बलाॅकेज का ओपन सर्जरी द्वारा इलाज संभव नहीं था इसलिए इस रोगी को न्यूरो एवं वेसक्यूलर रेडियोलोजिस्ट डाॅ सीताराम बारठ के पास रेफर किया गया।

डाॅ बारठ ने सक्शन कैथेटर को पैर की नस से हृदय के रास्ते से होते हुए मस्तिष्क की नस तक पहुँचाया। इस कैथेटर को उन्होंने सीधा खून के थक्के वाली जगह डाला और खून के थक्के को बाहर निकाल लिया। इससे सारी नसें आंशिक रुप से खुल गई। बचे हुए थक्कों की जगह उन्होंने एक परफ्यूजन कैथेटर डाला और करीब 36 घंटों तक रोगी को क्लाॅट गलाने की दवाईयां दी। इस प्रक्रिया को थ्रोम्बोलायसिस कहते है। इससे रक्त प्रवाह बिल्कुल सामान्य हो गया। और मस्तिष्क में सूजन भी धीरे-धीरे कम होने लगी। जिससे रोगी होश में आने लगा, हाथ-पैर हिलाने लगा और सामान्य रुप से बात करने लगा।

डाॅ बारठ ने बताया कि मस्तिष्क की नसों में ब्लाॅकेज का ओपन सर्जरी द्वारा इलाज नहीं हो सकता। इस बीमारी के इलाज हेतु एण्डो-वेसक्यूलर पद्धति की आवश्यकता होती है। इसलिए इस बीमारी के उपचार हेतु ऐसे हाॅस्पिटल में जाना पड़ता है जहां न्यूरो एवं वेसक्यूलर इंटरवेंशनल रेडियोलोजिस्ट मौजूद हो।

क्या होता है सेरीब्रल साइनस थ्रोम्बोसिस?

मस्तिष्क की मुख्य शिराएं जो खून के थक्कों द्वारा अवरुद्ध हो जाती है उन्हें सेरीब्रल साइनस थ्रोम्बोसिस कहा जाता है। इन अवरुद्ध नसों के कारण मस्तिष्क में सूजन आना शुरु हो जाती है जिससे रोगी कोमा में चला जाता है।

किन लोगों में यह बीमारी होने की आशंका ज्यादा होती है?

जिन लोगों में प्रोटीन सी एवं एस की कमी, निर्जलीकरण, स्टेराॅयड व गर्भ निरोधक गोलियों का उपयोग आदि कारणों से सेरीब्रल साइनस थ्रोम्बोसिस बीमारी होती है।

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