Wednesday , 16 October 2019
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पीआईएमएस में एड्स मरीजों को मिलेगी संपूर्ण निःशुल्क चिकित्सा सुविधा

पीआईएमएस में एड्स मरीजों को मिलेगी संपूर्ण निःशुल्क चिकित्सा सुविधा

उदयपुर। उमरडा स्थित पेसिफिक इंस्टीट्ययूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) में नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी भारत सरकार के पीपीपी मोड पर राजस्थान के पहले एआरटी सेंटर का उद्घाटन गुरुवार को पीआईएमएस के चेयरमैन आशीष अग्रवाल, शीतल अग्रवाल, डीडीजी नाको डॉ. आरएस गुप्ता, प्रोजेक्ट डायरेक्टर (एड्स) राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी (आरसेक) डॉ. एस. एस चौहान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव टांक, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. राघवेंद्र राय, आरसेक असिस्टेंट प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरके सोनी ने किया। इस अवसर पर आईसीटीसी सेंटर और सुरक्षा क्लीनिक का भी अतिथियों ने फीता काट कर शुभारंभ किया।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में पीआईएमएस के चेयरमैन आशीष अग्रवाल ने कहा कि पीपीपी मोड पर राजस्थान का यह पहला एंटी रिट्रोवायरल सेंटर एड्स उपचार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। एआरटी सेन्टर का मुख्य उद्देश्य उदयपुर संभाग जैसे एड्स संवेदनशील क्षेत्र में पीडितों को निशुल्क उपचार,परामर्श, काउंसलिंग प्रदान करने के साथ ही जागरूकता लाना है। यहां सभी सुविधाएं निःशुल्क मिलेंगी। एड्स उपचार के मोर्चे पर अब हम और अधिक सशक्त उपस्थित दर्ज करवा सकेंगे।

श्री अग्रवाल ने बताया कि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाको) ने देशभर में एड्स के बेहतर उपचार व जागरूकता के लिए 95-95-95 इनिशिएटिव हाथ में लिया है। इसमें सभी एड्स मरीजों को एआरटी सेंटरों से जोड कर सटीक काउंसलिंग दिलाना, नियमित उपचार को प्रेरित कर उनकी जीवन प्रत्याशा को बढाना, वायरल लोड को कम करना आदि उद्देश्यों को 2022 तक हासिल करना शामिल है। इसी इनिशिएटिव के तहत एआटी सेंटर्स को पीपीपी मोड पर दिया जा रहा है। इस केंद्र की सभी सुविधाएं पीआईएमएस द्वारा निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी।

मुख्य अतिथि डॉ. आरएस गुप्ता ने कहा कि भारत में कुल 500 एआरटी सेंटर है जिनमें से निजी क्षेत्र में यह23वां व राजस्थान का पहला एआरटी सेंटर है। उन्होंने बडी संख्या में उपस्थित चिकित्सकों, छात्रों, व मरीजों-तीमारदारों से कहा कि एड्स के उपचार में हमेशा राइट थिंक, राइट टाइम, राइट प्लेस की जरूरत होती है और पेसिफिक इंस्टीट्ययूट ऑफ मेडिकल साइंसेज इस पर खरा उतरता है। इस केंद्र की स्थापना के साथ ही दक्षिणी राजस्थान के उन मरीजों तक भी पहुंच बनाई जा सकेगी जो अब भी इस बीमारी से अनजान हैं या जिन्हें उपचार सुविधाओं की दरकार है।

डॉ. गुप्ता ने थाईलैण्ड का उदाहरण देत हुए कहा कि वहां पर एड्स का स्तर बढने के साथ ही जागरूकता कार्यक्रम का भी इतना ज्यादा विस्तार हुआ है कि हर ट्यूरिस्ट को यौन संक्रमण रोकने के निरोधक साधन सुलभ करवाए जाते हैं। हमारे देश में भी एड्स उपचार के हर स्तर पर सरकारी, गैर सरकारी, सामाजिक व सामुदायिक प्रयासों के शानदार गठजोड के जबर्दस्त परिणाम सामने आए हैं। मृत्यु दर में 50 फीसदी की कमी आ गई है। हर मरीज की बेहतरीन काउंसलिंग उसकी जीवटता और जिजीविषा को बढा देती है।

सीएमएचओ डॉ. संजीव टांक ने बताया कि उदयपुर में 4500 एड्स रोगियों को चिह्नित किया गया है जिनमें से 3000 का आरएनटी मेडिकल कॉलेज एआरटी सेंटर पर उपचार किया जा रहा है। इस वर्ष 850 नए मरीजों को चिह्ति किया गया है जिनकी काउंसलिंग हो गई है। उम्मीद है कि पेसिफिक एआरटी केंद्र पर और अधिक मरीजों की स्क्रीनिंग व काउंसलिंग हो सकेगी।

डॉ. एसएस चौहान ने कहा कि इस राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में कुल 19 एआरटी सेंटर हैं तथा 25लिंक सेंटर हैं मगर पीआईएमएस सेंटर में पीपीपी मोड पर पहला एआरटी सेंटर खुलने से अब एड्स के मरीजों तक हमारी पहुंच आसान हो जाएगी। इस इंस्टीट्यूट पर राजस्थान ही नहीं, आस-पास के कई राज्यों के मरीज उपचार को आते हैं। उनमें से एड्स के मरीजों का भी पता लगाया जा सकेगा। यौन संक्रमण के उपचार का केंद्र खुलने से अब एसटीआई व आरटीआई के मरीजों को भी निशुल्क सटीक उपचार मिल सकेगा। प्रिंसिपल डॉ. चंद्रा माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए पीआईएमएस की विभिन्न गतिविधियों, चिकित्सा क्षेत्र में स्थापित नए आयामों आदि के बारे में जानकारी दी। एसोसिएट प्रोफेसर महिला एवं प्रसूति विभाग डॉ. प्रदीप भटनागर ने बताया कि एड्स पीडित प्रसूताओं को एआरटी सेंटर पर विशेष चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी ताकि बच्चे में एड्स का संक्रमण नहीं हो। इस अवसर पर अतिथियों ने एआरटी सेंटर, आईसीटीसी सेंटर और सुरक्षा क्लीनिक की सभी व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।

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