Wednesday , 16 October 2019
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‘नवजात शिशु की भोजन नली का सफल आॅपरेशन’

‘नवजात शिशु की भोजन नली का सफल आॅपरेशन’

उदयपुर। गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल, उदयपुर के बाल एवं शिशु रोग सर्जन डाॅ अतुल मिश्रा ने दो दिन के नवजात के जन्म से जुड़ी भोजन एवं साँस की नली का जटिल आॅपरेशन कर स्वस्थ किया। बाल एवं शिशु रोग सर्जन डाॅ अतुल मिश्रा के साथ निश्चेतना विभाग के डाॅ करुणा व डाॅ अनिल, बाल एवं शिशु रोग विभाग के डाॅ सुभाष बमनावत व डाॅ हरतेश, नवजात गहन चिकित्सा ईकाई (छप्ब्न्) के नितिन, कोमल, नूरजहां, नरेंद्र एवं नर्सिंग स्टाफ सम्मलित थे।

डाॅ अतुल मिश्रा ने बताया कि बेबी आॅफ सुमित्रा, पैदा होते ही मुंह से झाग व दूध न पी पाने के कारण गीतांजली हाॅस्पिटल में भर्ती हुआ था। एक्स-रे की जांच से पता चला कि नवजात के खाने की नली (ईसोफेगस) पूर्ण रुप से विकसित नहीं थी व सांस नली (ट्रेकिया) में खुल रही थी। इस बिमारी को ट्रेकियो इसोफेगल फिस्टूला कहते है। इसी बच्चे के मल द्वार न होने (एनोरेक्टल मालर्फोमेशन) की भी समस्या थी। लगभग तीन से चार घंटें चले जटिल आॅपरेशन में भोजन नली को सही जोड़ा गया तथा मल द्वार के पहले चरण का भी सफल आॅपरेशन किया गया। मात्र 1.8 किलो वजनी नवजात अब पूर्णतः स्वस्थ है और दूध भी पी पा रहा है। यह बिमारी हर तीन या चार हजार बच्चों में से किसी एक को होती है।

डाॅ मिश्रा अब तक पाँच नवजात शिशुओं का, जो ट्रेकियो इसोफेगल फिस्टूला बीमारी से जूझ रहे थे, का सफल इलाज कर चुके है जो फाॅलोअप पर स्वस्थ पाए गए। यह पाँचों सफल आॅपरेशन गीतांजली हाॅस्पिटल की उपलब्धि को दर्शाते है।

क्या होता है ट्रेकियो इसोफेगल फिस्टूला?

डाॅ अतुल मिश्रा ने बताया कि ट्रेकियो इसोफेगल फिस्टूला एक बहुत ही गंभीर बिमारी होती है। इसमें भोजन की नली और साँस की नली जन्म से ही जुड़ी हुई होती है जिससे बच्चा कुछ खा-पी नहीं पाता है। इस बिमारी का निदान एवं आॅपरेशन अत्यंत ही मुश्किल है क्योंकि इसमें जान को खतरा होता है। इस बिमारी में बच्चे को बार-बार न्यूमोनिया, साँस की नली में रुकावट, साँस लेने में तकलीफ, मुँह से झाग आना और खाना या पानी निगलने में दिक्कत होती है और बच्चे की जान भी जा सकती है ।

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