Wednesday , 16 October 2019
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धीमा जहर है डिस्टेनिया, जो शरीर को विकलांग करने की क्षमता रखता है – डाॅ. विनीत बांगा

धीमा जहर है डिस्टेनिया, जो शरीर को विकलांग करने की क्षमता रखता है – डाॅ. विनीत बांगा

उदयपुर । फोर्टिस जेके हाॅस्पिटल में हुए ईलाज से मिला नया जीवन। रोगी की कहानी भी उतनी ही गंभीर और दिल दुखः देने वाली है जितना यह रोग डिस्टेनिया मस्तिष्क की एक बीमारी है।

उदयपुर के महज 15 किमी दूर डबोक कि रहने वाली देव प्रकाश की मंजली पुत्री नेहा गवारिया को न्यूरोलाॅजिकल डिसआॅर्डर के कारण 8 साल से जिन्दगी और मौत के बीच जीवन प्रत्याशा को तलाशती रही। इसी कारण कक्षा नौ तक पढ़ते पढते चलने में नाकामी की वजह से घर सहारा बन गया और स्कूल के साथ-साथ जीने की आस भी छोड दी। नेहा (रोगी) ने बताया कि यह बीमारी 2010 में पहले पैरो से शुरू हुई, तथा बीमारी ने अपंग करते हुए अधमरा कर दिया। इसके बाद धीरे-धीरे हाथों ने काम करना भी बंद कर दिया। साथ ही चेहरा बाई तरफ मुड गया और पूरे शरीर अकड गया जिससे एक कदम भी चलना दुभर हो गया।

सी दुर्लभ बीमारी से परिवार सक्ते में आ गया कि आखिर यह बीमारी है क्या और बच्ची का भविष्य क्या होगा। पिता पेशे से टेक्सी ड्राइवर है प्रति दिन डबोक एयरपोर्ट पर यात्रियों को शहर लाने ले जाने का कार्य करते है। पिता ने भी इलाज के लिए पूरे प्रयत्न किये यहां वहां कई जगह से ईलाज लिया लेकिन सबकुछ सिफर निकला। देवी-देवताओं का ही सहारा बचा था। आस-पास के सभी स्थानों पर जा आये लेकिन कही भी इस इलाज कि सुनवाई नहीं हुई कुछ अस्पतालों में ईलाज बहुत मंहगा बताया गया। अहमदाबाद, मोडासा में डाॅक्टरों ने बीमारी को दुर्लभ एवं लाइलाज बताया तो उपचार की आस ही छोड़ चुका परिवार निराश हो गया।

फिर भी माता-पिता ने अच्छे ईलाज की आस नहीं छोडी इसी आस ने एक दिन टेक्सी की सवारी के रूप में सहारा मिला अमेरिकी महिला नीना का जो उदयपुर घूमने आई थी। उपचार की पूरी जिम्मेदारी लेकर फोर्टिस जेके हाॅस्पिटल में न्यूरोलाॅजिस्ट डाॅ. विनीत बांगा के पास भेजा। जहां नेहा की बीमारी पर पूर्ण अध्ययन कर उपचार प्रारम्भ किया सफलता मिली।

डाॅ विनीत बांगा ने बताया कि नेहा डिस्टोनिया से पीडित है जो कि एक न्यूरोजाॅजिकल डिसआॅर्डर है जिसमें मस्तिष्क में एक रसायन (डोपामीन) की कमी हो जाती है जिससे शरीर के अंग कमजोर होने लगते है। और यह धीरे-धीरे पूरे शरीर में बढने लगता है। इसके लक्षणों में हाथ-पैरो में कमजोरी, ऐठन, जकड़न, टेडा होना इत्यादि हो सकते है। डिस्टोनिया कई तरह के होते है जिसमें से कुछ तरह के डिटोनिया का ईलाज संभव है। इसके अलावा मरीजो को हाथ-पैर का काॅंपना, सिरदर्द, भूलना इत्यादि की परेशानी भी हो सकती है।

डाॅ बांगा ने बताया कि नेहा की विस्तार से जांच की गई तथा अत्याधुनिक ट्रिटमेंट अपनाया गया। कुछ ही घण्टों के उपचार के परिणाम सामने आने लेगे तो उपचार को आगे बढ़ाया गया। नेहा मात्र 8 घण्टे में ठीक होने लगी और इस बीमारी से उभर कर अपने स्वयं के कार्य कर रही है एवं उसे स्वस्थ हालत में आज अस्पताल से छुट्टी दे दी जायेगी। यह मेवाड़ ही नही मेडिकल सांइस में भी अध्ययन का विषय है कि 8 साल से डिस्टोनिया से पीड़ित कैसे इतना जल्दी ठीक हो गई।

डाॅ. बांगा ने बताया कि अधिकतर मरीज अस्पताल में न जाकर बीमारी को उपरी प्रकोप समझ लेते है तथा बीमारी के साथ जीने की आदत डाल लेते है जो उम्र के साथ बढती यह बीमारी विक्राल रूप ले लेती है। समय पर स्तर दर स्तर उपचार को अपना कर मस्तिष्क की किसी भी बीमारी का उपचार सम्भव है। हाॅस्पिटल के फेसिलिटी डाॅयरेक्टर हरजीत सिंह भगत ने सभी मिडिया कर्मियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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