Friday , 18 October 2019
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खुश रहने से ठीक रहेगा स्वास्थ्य

अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो हमेशा खुश रहें। मन अगर खुश है तो हर बिमारी दूर रहती है वहीं तनाव और निराशा बिमारियों को बढ़ाती है। अगर आप खुश रहते हैं, आपकी सोच सकारात्मक है तो आप हमेशा स्वस्थ रहेंगे। हाल ही में की गई एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग सकारात्मक सोच रखते हैं उन्हें डेमेंशिया यानी मनोभ्रंश रोग होने की संभावना कम रहती है। डिमेंशिया एक प्रकार की मानसिक बीमारी है। डिमेंशिया होने पर आदमी की स्मरण शक्ति समाप्‍त हो जाती है और वह सबकुछ भूल जाता है।
दरअसल बढ़ती उम्र के साथ-साथ लोगों में तनाव भी बढ़ता जाता है और दिमाग में कई तरह के नकारात्मकता (निराशावादी) विचार भी जन्म ले लेते हैं ऐसे लोगों में डेमेंशिया होने का खतरा ज्यादा रहता है लेकिन जो लोग इन सब चीज़ों से बेफिक्र रहतें है और सकारात्मक रुप के साथ आगे बढ़ते हैं उन्हें डेमेंशिया का खतरा नहीं होता। डेमेंशिया होने की केवल एक यही वजह नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार ये अनुवांशिक, वातावरण और खराब लाइफ स्टाइल के कारण भी हो सकता है। बड़ी उम्र में बुजुर्गों में डेमेंशिया होने का खतरा ज्यादा होता है।
सकारात्क स्वभाव और सकारात्मक सोच डेमेंशिया (मनोभ्रंश) होने के खतरे को बहुत कम कर देता है। इसपर अध्ययन करने के लिए डॉक्टर लेवे और उनके साथियों ने 4,765 लोगों को चुना जिनकी उम्र करीब 60 साल थी और चार साल तक उन्हें फॉलो किया और समझने की कोशिश की। अध्ययन के दौरान उन्होंने पाया की शुरुआत में उन लोगों को डेमेंशिया की शिकायत नहीं थी पर धीरे-धीरे उनमें डेमेंशिया का खतरा हो गया।
जो लोग अपने व्यवहार में सकारात्मकता रखते हैं सकारात्मक रहते हैं उनमें निराशावादी सोच रखने वालों की तुलना में डेमेंशिया का रिस्क 4.5 प्रतिशत तक कम रहता है। जबकि पॉजीटिव एटीट्यूड वाले लोगों में इसका खतरा सिर्फ 2.6 प्रतिशत होता है। इससे पहले एक अध्ययन को नकारात्मक व्यवहार को डेमेंशिया होने का कारण बताया गया था।
कम रौशनी वाले ऑफिस में काम करने से याद्दाश्त पर असर
हल्की रौशनी में काम करते हैं तो इसका असर आपकी याद्दाश्त पर पड़ सकता है। एक नये अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन के अनुसार कम रौशनी वाले ऑफिस में समय बिताने से दिमाग के स्ट्रक्चर में बदलाव होता है और याद रखने और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती हैं।
जिन लोगों को कम रौशनी वाले कमरे में रखा गया। अध्यान में पाया गया कि उनमें सही ब्रेन को बनाए रखने के लिए जिस रसायनिक पदार्थ की जरूरत होती है वो कम हो रहा था। इसमें पाया गया कि उनकी याददाश्त और सीखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। अध्ययन के अनुसार कम रौशनी में काम करने से लोग आलसी हो जाते हैं।

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