Sunday , 21 July 2019
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खानपान में रसायन और कीटनाशक के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर रोगियों की संख्या बढ़ी

खानपान में रसायन और कीटनाशक के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर रोगियों की संख्या बढ़ी

  • आठ जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस

लखनऊ. मस्तिष्क में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि मस्तिष्क अर्बुद अर्थात ब्रेन ट्यूमर है. संयुक्त राज्य की रिपोर्ट के अनुसार सभी कैंसरों का 1.4 प्रतिशत, मौतों का 2.4 प्रतिशत और बच्चों के कैंसरों का 20-25 प्रतिशत है. ये भारत में कितनी जटिल समस्या है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर साल 40-50 हजार लोग इसके मरीज बनते हैं और तीन प्रतिशत ही बच पाते हैं.

खान-पान की चीजों रसायन और कीटनाशक के इस्तेमाल से रोगियों की संख्या बढ़ रही है. ब्रेन ट्यूमर रोगियों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए सन 2000 में जर्मन ब्रेन ट्यूमर ऐसोसिएशन ने 8 जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाने का निर्णय लिया. उस समय कुल 15 देशों ने मिलकर इस दिवस को मनाना शुरू किया. जो अब विश्व भर में लोगों में जागरूकता लाने की दृष्टि से मनाया जाता है.

ब्रेन ट्यूमर ज्यादातर लड़कियों में पाया जाता है

भारत में ब्रेन ट्यूमर के रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. सबसे चिंता की बात है कि बचपन में होने वाले कैंसर के अध्ययन के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर ज्यादातर लड़कियों में पाया जाता है. ट्यूमर में रेडिएशन उपचार के कारण बच्चों जबरदस्त नुकसान पहुंचाने की भी संभावना ज्यादा रहती है. इस कारण रेडिएशन की नौबत न आये. इसके लिए सतर्कता बरतना जरूरी है.

120 प्रकार के हैं ब्रेन ट्यूमर

ब्रेन ट्यूमर, कैंसर का ही एक प्रकार है. जो मस्तिष्क के अंदर होता है. ब्रेन ट्यूमर के 120 प्रकार हैं. पीड़ितों के बचने की तीन प्रतिशत दर स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है. खानपान की चीजों में रसायन और कीटनाशक का अत्यधिक इस्तेमाल होने के कारण इसके रोगियों की संख्या बढ़ रही है.

इसके अलावा मोबाइल का अधिक इस्तेमाल भी ब्रेन ट्यूमर का कारण बन सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि मस्तिष्क में नियमित दर्द रहने पर अक्सर लोग उसे माइग्रेन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन इस बीमारी से बचाव के लिए जांच जरूर कराना चाहिए.

सेलफोन भी कारण है ब्रेन ट्यूमर का

‘एम्स’ के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के एक सर्वे के अनुसार सेलफोन के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर का खतरा 1.33 गुना बढ़ जाता है. पहले भी सेलफोन से संभावित बुरे प्रभावों पर कई देशों में शोध किए गए हैं लेकिन वहां भी इनके नतीजों पर सरकारों का रुख उत्साहजनक नहीं दिखा. कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (सीबीसी) ने अपने सर्वे में पाया कि अगर सेलफोन को जेब, ब्रा और पेंट में रखा जाए तो इससे शरीर को मिलने वाले रेडिएशन मानक स्तरों से कहीं ज्यादा होते हैं. फिर फोन किसी भी नामी कंपनी का ही क्यों न हो.

बार-बार बदलना पड़े चश्मे का नंबर तो दिखाएं न्यूरोलाजिस्ट को

गोरखपुर के फीजीशियन डाक्टर अतुल शाही का कहना है कि अचानक मिर्गी के दौरे पड़े, बार-बार चश्मे के नंबर बदलने की जरूरत पड़े. सिर में दर्द हो या बच्चों के कान में परेशानी जैसी समस्या हो तो ये ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं. यदि सिर में लगातार तेज दर्द होता है. सिर के आकार में कोई बदलाव आ रहा है तो सावधान हो जाना चाहिए. ये ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं.

ब्रेन ट्यूमर दो माह के बच्चे से लेकर 80 साल तक किसी भी उम्र में हो सकता है. सबसे ज्यादा दिक्कत होती है कि इसका लक्षण जल्दी नहीं दिखते. ये देखा गया है कि 50 प्रतिशत मरीजों को इस बीमारी के एक साल बाद पता चलता है. 12 से 13 प्रतिशत मरीज तो पांच साल बाद जान पाते हैं. 20 से 40 वर्ष की आयु वाले लोगों में ब्रेन ट्यूमर अमूमन बिना कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं.

शुरूआती स्टेज में इसका सफल उपचार संभव होता है. डाक्टरों के अनुसार सभी ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होते और अधिकतर ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के बाहर नहीं फैलते. ये कुछ ऐसे लक्षण होते हैं, जिनसे ब्रेन ट्यूमर का शक होता है, ये लक्षण अन्य तकलीफों में भी हो सकते हैं.

समय रहते इलाज होने पर हो सकते हैं ठीक

डाक्टर महेंद्र पांडेय का कहना है कि समय रहते सीटी स्कैन और एमआरआई के माध्यम से इलाज शुरू हो जाने पर इसे ठीक किया जा सकता है. इसमें ज्यादातर आपरेशन ही किया जाता है. इनमें से बहुत से ट्यूमर दूरबीन और नाक के रास्ते से भी निकाले जा सकते हैं.

ऑपरेशन के बाद ट्यूमर की जांच की जाती है. उसे एक से चार तक ग्रेडिंग में बांटा जाता है. जांच से ब्रेन ट्यूमर के आगे का इलाज रेडियो थेरेपी और कीमोथेरेपी से किया जाता है.
ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी काफी सुरक्षित

प्रयागराज के न्यूरोलाजिस्ट डाक्टर बीके सिंह का कहना है कि पहले लोग सर्जरी के नाम से डरते थे लेकिन आज मौजूदा समय में आधुनिक तकनीकों के आगमन के कारण ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी काफी सुरक्षित और प्रभावी हो गई है.

सर्जरी के बाद मरीज आम लोगों की तरह लंबा जीवन जीते हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के विकास के कारण आज ब्रेन ट्यूमर के मरीजों का इलाज कारगर एवं आसान हो गया है. इससे ब्रेन ट्यूमर के मरीज 10 साल, 20 साल और यहां तक कि 50 साल तक भी जीवित रहते हैं.

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