Sunday , 21 July 2019
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कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के लिए होगा 25 लाख करोड़ का निवेश : कोविंद

कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के लिए होगा 25 लाख करोड़ का निवेश : कोविंद

नई दिल्ली, 20 जून (उदयपुर किरण). राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ग्रामीण क्षेत्र, कृषि और किसानों को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार पर ही सशक्त राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का निर्माण संभव है. उन्होंने कहा कि हमारे किसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं. राज्यों को कृषि विकास में पूरी मदद मिले, इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है. साथ ही कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आने वाले वर्षों में 25 लाख करोड़ रुपये का और निवेश किया जाएगा.

राष्ट्रपति कोविंद ने संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए अपने अभिभाषण में कहा कि वर्ष 2022 तक देश के किसान की आय दोगुनी हो सके, इसके लिए पिछले पांच वर्षों में कई कदम उठाए गए हैं. न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) में बढ़ोतरी का फैसला हो या खाद्य प्रसंस्करण में शत-प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश(एफडीआई) को मंजूरी, दशकों से अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का काम हो या फिर ‘फसल बीमा योजना’ का विस्तार, ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’ हो या फिर यूरिया की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग, उनकी सरकार ने किसानों की ऐसी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं को समझते हुए, अनेक फैसले लिए हैं. सरकार ने कृषि नीति को उत्पादन-केंद्रित रखने के साथ-साथ आय-केंद्रित भी बनाया है.

कोविंद ने कहा कि उनकी सरकार के इन्हीं प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’. इसके माध्यम से सिर्फ तीन महीने में ही 12 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों के पास पहुंचाई जा चुकी है. हर किसान को इस योजना के दायरे में लाए जाने के बाद, अब इस योजना पर प्रतिवर्ष लगभग 90 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

कृषि उपज के भंडारण की सुविधा से किसानों की आर्थिक सुरक्षा को बल मिलता है. अब ‘ग्रामीण भंडारण योजना’ के माध्यम से किसानों के अपने गांव के पास ही भंडारण की सुविधा प्रदान की जाएगी. कृषि क्षेत्र में सहकारिता का लाभ, डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों को मिल रहा है. कृषि के अन्य क्षेत्रों में भी, किसानों को लाभान्वित करने के लिए 10 हज़ार नये ‘किसान उत्पादक संघ’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया में दूसरे स्थान पर है. हमारे देश में प्रथम स्थान पाने की क्षमता है. समुद्री मछली उद्योग तथा आंतरिक मत्स्य पालन द्वारा किसानों की आय में वृद्धि की अपार संभावना है. इसीलिए सरकार, ‘ब्लू रिवोल्यूशन’ यानि ‘नीली क्रांति’ के लिए प्रतिबद्ध है. मछली पालन के समग्र विकास के लिए एक अलग विभाग गठित किया गया है. इसी प्रकार, मत्स्य उद्योग से जुड़े इन्फ्रास्ट्राक्चर को विकसित करने के लिए एक विशेष फंड बनाया गया है.

कोविंद ने अपने अभिभाषण में कहा कि देश के निर्धन परिवारों को गरीबी से मुक्ति दिलाकर ही सरकार अपने संवैधानिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकती है. पिछले पांच वर्षों के दौरान देश में किसानों, मजदूरों, दिव्यांगजनों, आदिवासियों और महिलाओं के हित में लागू की गई योजनाओं में व्यापक स्तर पर सफलता मिली है. गरीबों को सशक्त बनाकर ही उन्हें गरीबी के कुचक्र से बाहर निकाला जा सकता है, इसीलिए सरकार ने गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों को आवास, स्वास्थ्य, जीवन की आवश्यक सुविधाओं, आर्थिक समावेश, शिक्षा, कौशल तथा स्वरोजगार के जरिए उन्हें सशक्त करने का मार्ग अपनाया है. यही दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय का कार्यरूप है.

राष्ट्रपति ने कहा कि देश के 112 ‘आकांक्षी जिलों’ के विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है. इन जिलों में देश के सबसे पिछड़े एक लाख 15 हजार गांव हैं. इन गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से, करोड़ों गरीब परिवारों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

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