Sunday , 21 July 2019
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आवास योजना में भ्रष्टाचार पर सख्त हुई ममता सरकार

आवास योजना में भ्रष्टाचार पर सख्त हुई ममता सरकार

कोलकाता, 21 जून (उदयपुर किरण). पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दो दिनों पहले ही कड़ा कदम उठाते हुए पार्टी नेताओं को निर्देश दिया है कि जिन लोगों से विभिन्न योजनाओं के नाम पर रुपये वसूले गए हैं उनका रुपया वापस दिया जाए. इसके बाद राज्यभर में बवाल मचा हुआ है. हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, मेदिनीपुर आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आम लोगों ने तृणमूल नेताओं का घेराव कर “कट मनी” (घूस) वापस मांगना शुरू कर दिया है. इसकी वजह से राज्य सरकार मुश्किल में फंसी हुई है. इसके बाद  मुख्यमंत्री के कार्यालय (सीएमओ) से आवास योजना से संबंधित उपभोक्ताओं का फोन नंबर मांगा गया है. इसके लिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों के लिए एक विशेष निर्देशिका जारी की गई है.

जिसमे आवास योजना के सभी उपभोक्ताओं का नाम और मोबाइल नंबर की तालिका तैयार कर सचिवालय में भेजी जाए. आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से उपभोक्ताओं को फोन करके पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि उन्हें आवास योजना का रुपया मिला है या नहीं मिला. अगर मिला तो कैसे मिला, कितना घूस देना पड़ा आदि के बारे में पता लगाया जाएगा.

इस बारे में पूछने पर केशपुर के बीडीओ दीपक घोष ने शुक्रवार को कहा कि सचिवालय से एक निर्देश मिला है. ब्लॉक स्तर पर सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है.सालबनी के बीडीओ संजय मालाकार ने भी इसे स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि जिले में पंचायत स्तर पर अधिकारियों को आवास योजना से जुड़े लोगों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है.

दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार गरीब लोगों के आवास के लिए गीतांजलि परियोजना तहत मकान तैयार कर कम कीमत पर लोगों को मुहैया कराती है. इसमें उपभोक्ताओं के लिए पक्का मकान तैयार करने हेतु राज्य सरकार ₹1.36 लाख रुपये देती है. पहली किस्त की राशि देने के बाद काम कितना हुआ है, यह देखा जाता है. उसके बाद उसकी तस्वीरें पंचायत के माध्यम से ब्लॉक ऑफिस में भेजी जाती है. काम आगे बढ़ने के बाद बाकी का किस्त भी दे दिया जाता है. इस बीच कई ऐसी शिकायतें आई हैं कि उपभोक्ताओं को मिली पहली किस्त की राशि सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े लोग ले गए और मकान तैयार करने का वादा कर गए लेकिन आज तक नहीं किया. कुछ शिकायतें ऐसी भी हैं कि गरीब लोगों को पैसे नहीं मिले जबकि जो बड़े बड़े मकानों में रहते हैं उनके नाम पर रुपये पास हो गए. दावा है कि विगत कुछ सालों में राज्य सरकार ने जो आवास तैयार कर लोगों के बीच वितरित किया है उसमें लगने वाले खर्च का 25 प्रतिशत हिस्सा सत्तारूढ़ पार्टी के लोगों ने उपभोक्ताओं से वसूला है.

ऐसी शिकायतें मिलने के बाद ममता बनर्जी बेहद नाराज हुई हैं मंगलवार को इस बारे में जब मुख्यमंत्री ने विशेष बैठक की थी तब उन्होंने पार्टी के पार्षदों को साफ कहा कि मुझे पता चला है कि राज्य भर में लोगों से आवास योजना के नाम पर 25 प्रतिशत रुपये वसूले गए हैं. मैं निर्देश दे रही हूं कि ये सारे रुपये लोगों को लौटाया जाए. सीएम के इस कड़े रुख के बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय में जिला शासकों को निर्देश दिया है कि आवास योजना के सभी उपभोक्ताओं का नाम और मोबाइल नंबर की तालिका तैयार कर सचिवालय में भेजी जाए.

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