Sunday , 21 July 2019
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अस्थमा व सीओपीडी से होने वाली मौतों में राजस्थान देश में सबसे आगे

अस्थमा व सीओपीडी से होने वाली मौतों में राजस्थान देश में सबसे आगे

अजमेर, 05 मई (उदयपुर किरण). अजमेर के पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. प्रमोद दाधीच ने कहा कि सकारात्मक पत्रकारिता समाज में परिवर्तन ला सकती है. उन्होंने पत्रकारों का आह्वान किया कि वे अपने लेखन से पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करें, जिससे अस्थमा व श्वास संबंधित रोगों से लोगों को बचाया जा सके. डॉ. दाधीच ने बताया कि अस्थमा व सीओपीडी से होने वाली मौतों में राजस्थान देश में नम्बर एक पर है. दाधीच विश्व अस्थमा दिवस पर अजयमेरू प्रेस क्लब के सदस्यों व परिवारजनों को संबोधित कर रहे थे.

जानकारी के मुताबिक गत 5 मई को मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में निःशुल्क अस्थमा, एलर्जी, स्लीप व श्वास रोग जांच व परामर्श शिविर का आयोजन किया गया. उन्होंने बताया कि राजस्थान में प्रति एक लाख में करीब साढ़े चार हजार लोग अस्थमा से ग्रसित हैं. विश्व में भारत सीओपीडी ग्रसित रोगियों में प्रथम स्थान पर है. अकेले भारत में सीओपीडी की वजह से मृत्यु दर 213 प्रति एक लाख है. यह आंकड़े इस रोग की गंभीरता को दर्शाते हैं. इसलिए इसके प्रति जागरुकता की जरूरत हैं. डॉ. दाधीच ने अस्थमा व श्वास रोग के कारणों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे घरों के आसपास उगने वाली गाजर घास, बंदर की रोटी, विलायती बबूल के कारण श्वास रोग होते हैं. नालियों व नालों में जमने वाली काई के कारण फंगल संक्रमण, श्वास व एलर्जी की बीमारी होती है. घरों में पालतू जानवर, रुई के बिस्तर, साफ सफाई का अभाव, घर की नालियों में कोकरोज आदि कई अंदरुनी व बाहरी कारण हैं. डॉ.प्रमोद दाधीच ने इस मौके पर स्लीप एप्निया व अन्य श्वास रोग व खर्राटे संबंधित रोगों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए.


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