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अब कोटा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से सुुनने का इलाज शुरू

अब कोटा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से सुुनने का इलाज शुरू

कोटा, 03 मई (उदयपुर किरण). सुनने की क्षमता कमजोर होने पर एक छोटी सी डिवाइस रोगी को 14 तरह की सुविधाएं देने लगेगी. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुडी यूएसए की पहली अत्याधुनिक डिवाइस ‘लिवियो-एआई’ की सुविधा ट्रायल रन के बाद इस सप्ताह से कोटा में चालू कर दी गई है. शीला चौधरी मार्ग स्थित कोटा हियरिंग सेंटर के ऑडियोलॉजिस्ट शुभम सिंह ने बताया कि लिवियो-एआई मशीन हिंदी, इंग्लिश, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलगु, उड़िया आदि 27 भाषाओं को रूपातंरित कर सुनाएगी. लोग दूसरी भाषा में बातचीत को अपनी भाषा में सुन व समझ सकेंगे. उन्हें कान में घंटी बजने की परेशानी से निजात मिलेगी और स्पष्ट आवाज सुनाई देने लगेगी.

मस्तिष्क व दिल की धड़कन का अलर्ट मिलेगा : सिंह ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये इससे विद्यार्थियों का ब्रेन स्कोर किया जा सकता है. जैसे-क्लास में बैठे बच्चे का ब्रेन कितना काम कर रहा है. इस समय उसका ब्रेन कहां है. रोगी इसे इंटरनेट से जोडकर फोन पर बात भी कर सकते हैं. हृदयरोगियों के दिल की धडकन भी इससे पता चल जाएगी. अचानक रोगी को किसी भी स्थान पर हार्ट अटैक आ जाने पर कुछ सेकंड में ही उसका फाल अलर्ट परिजनों तक पहुंच जाएगा, जिससे उसे तुरंत इलाज मिल सकता है. ऑडियोलॉजिस्ट ने बताया कि कोटा हियरिंग सेंटर पर 3 मई को डॉक्टर्स व नागरिकों ने इसका डेमो देखा. रोगियों को सुनने की क्षमता बढाने के लिये यहां 7 तरह की डिवाइस हैं. इनमें केनाल में व कान के पीछे लगने वाली बीटीई मिनी, आरआईसी, आईटीई, आईटीसी, सीआईसी और आईआईसी जैसी छोटी डिवाइस सुनने की क्षमता को सामान्य कर देती है.

8 प्रतिशत आबादी बहरेपन की शिकार : नेशनल सेम्पल सर्वे के अनुसार, देश में 7 से 8 प्रतिशत आबादी बहरेपन की समस्या से जूझ रही है. एक लाख में से 290 लोगों में यह रोग सामने आ रहे हैं. चंडीगढ़ में हुए अध्ययन के अनुसार, रोज 2 से 4 घंटे लगातार मोबाइल यूजर्स में बहरापन तेजी से बढ़ रहा है. पहले 45-50 वर्ष की उम्र में कम सुनने की समस्या होती थी, लेकिन आज 25 वर्ष की उम्र से पहले कम सुनाई देने की समास्या होने लगी है. स्मार्टफोन उपयोग करने वाले कोचिंग विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें क्लास में पीछे कम सुनाई देता है. यह डिवाइस उनकी सुनने की क्षमता को नार्मल कर देगी.

सुनने की सामान्य क्षमता 25 से 30 डेसिबल : सिंह ने बताया कि कान से सुनने की सामान्य क्षमता 25 से 30 डेसिबल होती है लेकिन तेज आवाज में रहने या नियमित शोरगुल के कारण सुनने की क्षमता कमजोर होने लगती है. वाहनों के तेज शोर के कारण यातायात पुलिसकर्मियों में चिड़चिड़ापन होता है. वे तनावग्रस्त हो जाते है. नॉइज क्रेकर के जरिये वे शोरगुल व हार्न की तेज आवाज से खुद को बचा सकते हैं.


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