Wednesday , 18 September 2019
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अंगदान के प्रति जागरुकता बढ़ाने की जरूरत : ममता

अंगदान के प्रति जागरुकता बढ़ाने की जरूरत : ममता

Kolkata, 13 अगस्त (उदयपुर किरण). पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अंगदान दिवस के मौके पर कहा कि देश को अंगदान के प्रति और अधिक जागरूक होने की जरूरत है. मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा कि आज अंगदान दिवस है. एक राष्ट्र के तौर पर हमें एक साथ मिलकर इस महत्वपूर्ण विषय के प्रति जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है. बंगाल उन चंद राज्य में से एक है, जिसने अंगदान के लिए सफलतापूर्वक ग्रीन कॉरिडोर निर्माण किया है ताकि अंग प्रत्यारोपण तेजी से हो सकें.

उल्लेखनीय है कि मौत के बाद भी दूसरों को नई जिंदगी देने के पुण्य कर्म अंगदान के प्रति पश्चिम बंगाल के लोग काफी अधिक जागरूक हैं. आंकड़े बताते हैं कि हर महीने यहां कमोबेश 50 लोगों को दूसरे के अंगों से नई जिंदगी मिलती है. बच्चों में युवाओं और अधेड़ उम्र के लोगों की मौत के बाद उनके परिजन बड़े पैमाने पर उनके अंगों को दान करने के प्रति जागरूक बने हैं. पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इसे बढ़ावा देने के लिए सरकारी अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण निःशुल्क कर दिया है. बंगाल के किसी भी कोने में अंगदान के लिए इच्छुक लोगों की सुविधाओं के लिए राज्य सरकार ने विशेष निर्देश दे रखा है. इसकी वजह से Kolkata के बड़े से बड़े सरकारी अस्पतालों से डॉक्टर राज्य के किसी भी कोने में उस अस्पताल में जा पहुंचते हैं, जहां लोग अंगदान के लिए इच्छुक होते हैं.

अंगों को सुरक्षित निकाला जाता है और ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उसे उस अस्पताल तक ले जाया जाता है जहां जरूरतमंद रोगी भर्ती रहते हैं. इतना ही नहीं अंगदान के प्रति लोगों को और अधिक सचेत करने के लिए राज्य सरकार ने इसे स्कूल पाठ्यक्रम में भी शामिल किया है. सबसे पहले अंगदान करने वालों से लेकर उन तमाम ऐसे लोगों के बारे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जिनकी मौत के बाद उनके अंगों से दूसरों को नई जिंदगी मिली है. अंगदान दिवस प्रतिवर्ष 13 अगस्त को मनाया जाता है. जागरूकता की कमी के कारण, लोगों के मन में अंगदान के बारे में भय और मिथक विद्यमान हैं. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य सामान्य मनुष्य को मृत्यु के बाद अंगदान करने की प्रतिज्ञा दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना हैं. अंगदान में अंगदाता के अंगों जैसे कि हृदय, लीवर (यकृत), गुर्दे, आंत, फेफड़े, और अग्न्याशय का दान उसकी मृत्यु के पश्चात ज़रूरतमंद व्यक्ति में प्रत्यारोपित करने के लिए किया जाता है.

भारत में संपन्न एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रत्येक वर्ष लगभग पांच लाख व्यक्तियों की मृत्यु अंगों की अनुपलब्धता के कारण हो जाती है, जिनमें से दो लाख व्यक्ति लीवर (यकृत) की बीमारी और पचास हज़ार व्यक्ति हृदय की बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. इसके अलावा, लगभग एक लाख पचास हज़ार व्यक्ति गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते हैं, जिनमें से केवल पांच हज़ार व्यक्तियों को ही गुर्दा प्रत्यारोपण का लाभ प्राप्त होता है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी समुदायों के व्यक्तियों से बहुमूल्य जीवन को बचाने वाले इस पवित्र कार्य में सहयोग करने के लिए उदारता से अंगदान करने का आग्रह किया है. मंत्रालय ने छठा विश्व और भारत का पहला भारतीय अंगदान दिवस तथा New Delhi में, अंगदान कांग्रेस 2010 का शुभारंभ किया.

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