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Thursday , 17 August 2017

संसद में आर्थिक सर्वे पेश, महंगाई होगी कम, GDP के आंकड़ों से मुश्किल में सरकार

मोदी सरकार के लिए शुक्रवार को संसद में पेश हुए आर्थिक सर्वे के आंकड़े परेशानी पैदा कर सकते हैं। सर्वे के मुताबिक इस वित्त वर्ष की आधी छमाही में जीडीपी 6.75 से 7.5 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ेगी।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि यह मुश्किल रुपये की विनिमय दर में तेजी, कृषि ऋृण माफी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने से संबंधित शुरुआती चुनौतियों के कारण होगी। यह पहला अवसर है जब सरकार ने किसी वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट दो बार प्रस्तुत की है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के लिए पहला आर्थिक सर्वेक्षण 31 जनवरी 2017 को लोकसभा में रखा था क्योंकि इस बार आम बजट फरवरी के शुरू में ही पेश किया गया। आज प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में फरवरी के बाद अर्थव्यवस्था के सामने उत्पन्न नयी परिस्थितियों को रेखांकित किया गया है।

जनवरी में पेश सर्वेक्षण में वर्ष 2016-17 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 6.75 से 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इस आर्थिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि कमजोर आर्थिक वृद्धि की वजह से रिजर्व बैंक की ओर से मौद्रिक नीति को नरम करने की संभावना पर जोर दिया गया है।

सरकार का कुल खर्च वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़कर 26 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाने का अनुमान है। वित्त मंत्रालय के एक दस्तावेज के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में इसके 21.46 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

वहीं सरकार का पूंजीगत खर्च 2019-20 तक 25 फीसदी बढ़कर 3.9 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच जायेगा। इस दौरान केवल रक्षा बजट के पूंजीगत खर्च में 22 फीसदी का इजाफा होगा। वहीं महंगाई दर में कमी रहने की संभावना है जो कि 4 फीसदी के आसपास रहेगा।

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), ऋृण प्रवाह, निवेश और उत्पादन क्षमता के दोहन जैसे अनेक संकेतकों से पता लगता है कि 2016-17 की पहली तिमाही से वास्तविक आर्थिक वृद्धि में नरमी आयी है और तीसरी तिमाही से यह नरमी अधिक तेज हुई है।

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