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Monday , 22 January 2018

वीरवर कल्लाजी राठौड़

 

राजेंद्रसिंह कविया, संतोषपुरा सीकर

शक्ति भक्ति रजपूती अर मजबूती रंगरूड़ै अर रसभीनै राजस्थानरी पिछाण है आन बान शान अर मरजादा रै पखै केतान कैता जंगी जौधार आपरा जीवण निछावर कर रजवट नै रूखाऴ मरजादा कायम कर अखी जस खाटियो है, आं पूजनीक अर सिमरणा बीरां री यादां में आज घणी जगै थांन चबुतरा थरपिजनै मेऴा भरता रै अर लोक देवता रा रूप में पूजिया जावै, उणां में ऐक बांको भड़ कल्लोजी राठौड़ हा।
संवत विक्रमी 1601 री आसोज सुदी आठम (दुर्गाष्टमी) रविवार रै दिन मारवाड़ रा एक गांव समियामा रा ठाकर अचऴाजी राठौड़ रै घरै आं रो जनम होयो, सातवें साल पिताजीरो इडर री लड़ाई में बलिदान होय ग्यो, अबै बड़ा पिताजी ठाकर उमैदसिंहजी वांनै सनातनी वीरां रा सही संस्कार सिखाय पाऴपोस मोटा किया, तरूण औस्था आवतांई भुजावां फड़कण लागी अर वीरता उछाऴा लेवण लागी कीं कर दिखावण रो जोश हिलौरा लेवण लागियो।

उणीज समै सूचणा आई कै मेवाड़ पर मुगलां धावो मांडियो है गांव गांव घर घर मांही राजपूत चितौड़ सामा जावणा ढूकियो कल्लौ जी बां मे आगीवांण रैया अर महाराणा उदयसीं कनै जाय पुगीया, राणाजी ओपतो मान देयर सारी परिस्थितियां बताय ऐड़ा सूरमा री रोजी रो बन्दोबस्त रैंडला सहित छप्पन गांवा री जागीर देय पक्को कीनो, अब कल्लाजी मेवाड़ रा चावा ठावा ठिकाणेदार बण गिया, अर आप रै ठिकाणैं में जावणरी महाराणा सूं आज्ञा मांगी राणाजी हाथी घोड़ा अर पैदल सेना रो दऴ देय विदा करिया, शुभ मोहरत देख कल्लाजी रैंडलैं बहीर होया, मारग में तेज तूफान अर बिरखा रो तांडव माचियो, बिकट मार्ग अर मेह रूकै नहीं थोड़ीक दूरी पर शिवगढ रो किलो बिजऴी रै पऴाकै निजरां आयो,अर कल्लाजी आपरा संग ने लेय शिवगढ पूगिया, शिवगढ राजाजी कल्लाजी री आवभगत करी अर अर दूजै दिन विदाई दी, उणसमैं शिवगढ री राजकुमारी बांनै देख मन में पति रूप वरण करियो पण संकोच बस माईतां ने केय नीं पाई।

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