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Monday , 22 January 2018

भाई-दूज का पौराणिक महत्व और पूजा की विधि

दीपावली के त्योहार के बाद भाई-दूज का पर्व देश में सदियों से मनाया जा रहा है। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा और क्षितिज पर विशाखा नक्षत्र रहेगा। भाई दूज के इस त्योहार को यम द्वितीया के रूप में भी मनाते आए हैं। भाई-दूज का यह पावन पर्व भाई और बहन के पवित्र रिश्ते और प्‍यार को दर्शाता है। इस दिन बहने भाई को तिलक लगाकर लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं तो भाई जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देता है। अब समय के साथ साथ त्योहार मनानें का चलन भी बदल गया है। लोग अपनी बहनों को गिफ्ट भी देने लगे है।

भाई-दूज का पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य देव की पत्नी छाया दो संताने थी। एक यमराज और दूसरी बेटी यमुना थी। यम अपनी बहन यमुना को बेहद प्रेम करते थे। यमराज अपनी बहन की हर मनोकामना पूरा करते थे। लेकिन यमुना जब भी यमराज को अपने घर खाने को बुलाती थी। लेकिन व्यस्त रहने के कारण यम पहुंच नहीं पाते थे। लेकिन एक दिन यमराज ने समय का परवाह किये बिना अपनी बहन से मिलने उनके घर पहुंच गए।

एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन अपनी बहन के घर पहुंचे थे। अपने भाई यमराज को देखकर यमुना काफी खुश हुई। उन्होंने अपने भाई को अपने हांथो से बनाकर कई पकवान खिलाए। जिसके बाद यम बेहद प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से कुछ मांगने को कहा वरदान मांगने को कहा। यमुना ने अपने भाई यमराज से वरदान मांगा से कहा कि आप हर साल इसी दिन मेरे घर खाने के लिए आएंगे। अगर कोई भाई अपनी बहन के घर जाता है आज के दिन तो उसे यम का भय न हो। उसके बाद यह प्रथा जो शुरू हुई आज तक चली आ रही है।

इस तरह करते हैं पूजा

भाई-दूज के दिन बहन एक छोटे से पात्र में जल लेकर अपने भाई हाथ में अर्पण करती है और गंगा जमुना को यमी पूजे यमराज को सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े यह मंत्र का जाप करती हैं और भाई के मंगलकामना का आशीर्वाद मांगती है। इसके बाद उपहार भी दिया जाता है।

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