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Tuesday , 12 December 2017

…अब बांसवाड़ा के पर्यटन विकास को लगेंगे पंख

बांसवाड़ा। जिला कलक्टर भगवतीप्रसाद ने कहा है कि माहीडेम और त्रिपुरा सुंदरी तीर्थ के कारण बांसवाड़ा की अन्तर्राष्ट्रीय पहचान भले ही हो परंतु अभी भी हमारे यहां प्रचुर मात्रा में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का पर्यटन की दृष्टि से दोहन करने की आवश्यकता है और यदि इस दिशा में सफल हो गए तो यह क्षेत्र कला, संस्कृति के साथ प्राकृतिक दृष्टि से भी एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन जाएगा।

कलक्टर प्रसाद शनिवार को माहीडेम स्थित विश्रांति गृह सभागार में जिले में पर्यटन विकास की दृष्टि से आयोजित अधिकारियों और प्रबुद्धजनों की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अगस्त से लेकर फरवरी माह तक बांसवाड़ा जिला प्राकृतिक सौंदर्य से लकदक रहता है और इस समय में यदि हम पर्यटकों को आकर्षित करने का प्रयास करें तो जिले के पर्यटन विकास को पंख लग जाएंगे। कलक्टर ने जिले में मेंगो फेस्टिवल, बेंबू फेस्टिवल जैसे आयोजनों की भी संभावनाओं को रखा।

इको ट्रेकिंग, बर्डफेयर और फोटोग्राफी प्रतियोगिता होगी: बैठक दौरान कलक्टर प्रसाद ने कहा कि जिले का लेंड स्केप इतना सुंदर है कि यहां पर देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले प्रशासन द्वारा स्वयं अधिकारियों के स्तर पर इको ट्रेकिंग प्रारंभ की जाएगी और इस माध्यम से जन-जन के समक्ष नैसर्गिक संपदा को सामने लाया जाएगा। उन्होंने जिले में बर्डफेयर के आयोजन के साथ ही फोटोग्राफी प्रतियोगिता के माध्यम से फोटोग्राफ आमंत्रित करने तथा इन फोटोग्राफ के आधार पर कॉफी-टेबल बुक प्रकाशित करवाकर देश-प्रदेश में भिजवाई जाएगी ताकि पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।

बनेगी सिटी ऑफ हण्डेªड आईलेण्ड की पहचान:  कलक्टर ने माही बैक वॉटर में स्थित टापूओं को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की आवश्यकता जताई और माही विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेन्द्र वर्मा को इनमें से एक टापू को इसी सत्र में तैयार करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने अक्टूबर माह में इस टापू पर कार्यक्रम रखने के भी निर्देश दिए और कहा कि यदि इस प्रकार से पर्यटन विकास के प्रयास किए जाए तो बांसवाड़ा सही मायने में सिटी ऑफ हण्डेªड आईलेण्उ बन जाएगा।

पर्यटन काउंसिल बनाकर प्रारंभ होंगे प्रयास: बैठक दौरान पूर्व राजपरिवार के जगमालसिंह ने कहा कि जिले में पर्यटन विकास से जुड़े विभागीय अधिकारियों और रूचि रखने वाले अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को सम्मिलित करते हुए पर्यटन काउंसिंल  का निर्माण किया जावे तथा प्रयास किए जावें तो बांसवाड़ा का पर्यटन दृष्टि से विकास संभव है। उन्होंने जिले में हेरिटेज, एडवेंचर, रूरल, टेªडिशनल मेडिकल, एग्रीकल्चर डाईवर्सिटी आठ अलग-अलग क्षेत्रों में पर्यटन विकास की संभावनाओं को उजागर किया और इसके लिए समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता जताई।

रेनफॉल ट्यूरिज़्म क्यों नहीं ?

बैठक दौरान जगमालसिंह ने मानूसन दौरान मुंबई में बड़ी तादाद में बारिश को देखने के लिए अरब देशों से पर्यटकों के आगमन का तथ्य उद्घाटित किया और कहा कि मुंबई में ऐसा हो सकता है तो बांसवाड़ा तो राजस्थान का चेरापूंजी है और यदि यहां पर रेनफॉल ट्यूरिज़्म सबसे बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने जिले में माही बैकवॉटर सहित टापूओं और बारहोमास भरे रहने वाले तालतलैयों का पर्यटन दृष्टि से विकास करने की संभावनाएं जताई।

जंगल सफारी शुरू करेंगे: बैठक दौरान उप वन संरक्षक अमरसिंह गोठवाल ने कहा कि शहर के समीप ही श्यामपुरा जंगल में वन विभाग द्वारा जंगल सफारी शुरू की जाएगी और यहां की नैसर्गिक संपदा के बारे में बताया जाएगा । उन्होंने इस वन क्षेत्र को नेचर पार्क व योगा पार्क के रूप में विकसित करने के लिए बनाई जा रही योजना के बारे में भी बताया।

इन्होंने भी दिए सुझाव: बैठक में बर्डवॉचर आदित्य काले, संगीत महाविद्यालय की मालिनी काले, निर्मला चेलावत, सईद रोशन, हेमांग, अनिल तलवाडि़या, जितेन्द्र वर्मा, अनिमेष पुरोहित सहित कई लोगों ने पर्यटन विकास की दृष्टि से सुझाव दिए। इस मौके पर जिला कलक्टर ने माही बैकवाटर में स्थित टापुओं पर दस हजार पौधे लगाने के लक्ष्य के अनुरूप् विश्रांति गृह परिसर में पौधरोपण भी किया गया।

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